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संधि एवं संधि विच्छेद

By ExamAtlas · 29/8/2026

संधि एवं संधि विच्छेद

संधि से 2 से 3 प्रश्न लगभग हर वर्ष आते हैं और यही व्याकरण का सबसे अंक-दायक भाग है। परीक्षा शब्द तोड़ने या जोड़ने को कहती है, इसलिए नियम रटने से अधिक ज़रूरी है यह पहचानना कि कौन-से दो वर्ण मिल रहे हैं।

संधि के तीन भेद

भेदकिसका मेलउदाहरण
स्वर संधिस्वर + स्वरविद्या + आलय = विद्यालय
व्यंजन संधिव्यंजन + स्वर या व्यंजनसत् + आनंद = सदानंद
विसर्ग संधिविसर्ग + स्वर या व्यंजननिः + बल = निर्बल

स्वर संधि के पाँच रूप

रूपनियमउदाहरण
दीर्घसजातीय स्वर मिलकर दीर्घदेव + आलय = देवालय
गुणअ/आ + इ = ए, + उ = ओ, + ऋ = अर्नर + इंद्र = नरेंद्र
वृद्धिअ/आ + ए/ऐ = ऐ, + ओ/औ = औएक + एक = एकैक
यण्इ/उ/ऋ के बाद भिन्न स्वरइति + आदि = इत्यादि
अयादिए/ऐ/ओ/औ के बाद स्वरने + अन = नयन

पहचान का सबसे तेज़ तरीका यह है कि संधि के बाद बने वर्ण को देखिए। ए बना तो गुण, ऐ या औ बना तो वृद्धि, य् या व् आया तो यण्, और अय्, आय्, अव्, आव् आया तो अयादि संधि है।

✗ नर + इंद्र = नरेंद्र में वृद्धि संधि है  |  ✓ यह गुण संधि है, क्योंकि अ और इ मिलकर ए बना है

व्यंजन एवं विसर्ग संधि के प्रमुख नियम

  • त् + च हो तो त् का च् — उत् + चारण = उच्चारण।
  • त् + ज हो तो त् का ज् — सत् + जन = सज्जन।
  • म् + व्यंजन हो तो म् का अनुस्वार — सम् + तोष = संतोष।
  • विसर्ग + अ में विसर्ग का ओ — मनः + रथ = मनोरथ।
  • निः + र में विसर्ग लुप्त और स्वर दीर्घ — निः + रस = नीरस।

विसर्ग संधि में निः और दुः से बने शब्द बार-बार पूछे जाते हैं — निर्बल, निर्धन, निश्चय, दुर्बल, दुर्जन, दुश्चरित्र। इनका पैटर्न एक बार पकड़ लेने पर पूरा समूह हल हो जाता है।

आसान सूत्र: विसर्ग के आगे यदि क, ख, प, फ हो तो प्रायः विसर्ग बना रहता है या ष्/श् बनता है; यदि घोष वर्ण या स्वर हो तो र् बनता है — निर्जन, दुर्गम।

TRE संकेत: परिणाम-आधारित पहचान सबसे तेज़ है — ए मतलब गुण, ऐ-औ मतलब वृद्धि, य्-व् मतलब यण्। निः और दुः वाले शब्द समूह में याद कीजिए, क्योंकि पत्र इन्हीं से प्रश्न बनाता है। पाँच विकल्पों में दो विकल्प प्रायः बहुत मिलते-जुलते होते हैं, इसलिए विच्छेद लिखकर मिलाइए, अनुमान मत लगाइए।

60 सेकंड का रिवीजन

  • संधि तीन प्रकार की — स्वर, व्यंजन और विसर्ग।
  • स्वर संधि के पाँच रूप — दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण् और अयादि।
  • ए बने तो गुण, ऐ-औ बने तो वृद्धि संधि।
  • इ, उ, ऋ के बाद भिन्न स्वर आने पर यण् — इत्यादि, मन्वंतर।
  • उत् + चारण = उच्चारण, सत् + जन = सज्जन व्यंजन संधि के उदाहरण।
  • मनः + रथ = मनोरथ, निः + बल = निर्बल विसर्ग संधि हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुण और वृद्धि संधि में अंतर कैसे पहचानें?

परिणाम देखकर। यदि मेल के बाद ए, ओ या अर् बना है तो गुण संधि है, जैसे नर और इंद्र से नरेंद्र। यदि ऐ या औ बना है तो वृद्धि संधि है, जैसे एक और एक से एकैक। यही सबसे तेज़ और भरोसेमंद पहचान है।

यण् संधि कब होती है?

जब इ, ई, उ, ऊ या ऋ के बाद कोई भिन्न स्वर आए। तब इ का य्, उ का व् और ऋ का र् हो जाता है। इति और आदि से इत्यादि, सु और आगत से स्वागत, तथा मनु और अंतर से मन्वंतर इसके मानक उदाहरण हैं।

निः और दुः वाले शब्द कैसे याद रखें?

समूह बनाकर। निर्बल, निर्धन, निर्जन, निर्गुण एक समूह है जहाँ विसर्ग र् बना; निश्चय, निष्फल दूसरा समूह है जहाँ श् या ष् बना। दुर्बल, दुर्जन, दुर्गम भी उसी नियम पर चलते हैं, इसलिए एक साथ याद होते हैं।

संधि और समास में क्या अंतर है?

संधि में दो वर्णों का मेल होता है और वर्ण में परिवर्तन आता है, जैसे विद्या और आलय से विद्यालय। समास में दो या अधिक पदों का मेल होता है और बीच का कारक चिह्न लुप्त होता है, जैसे राजा का पुत्र से राजपुत्र।

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संधि एवं संधि विच्छेद | BPSC TRE 4.0 हिंदी व्याकरण — ExamAtlas