विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: भारत की उपलब्धियाँ
Science and Technology: India's Achievements
यह विषय 1 से 2 प्रश्न देता है और इसमें सबसे ताज़ा तथ्य आते हैं, इसलिए यही वह जगह है जहाँ पुरानी किताबों से पढ़ने वाले उम्मीदवार पिछड़ जाते हैं। अभियानों के नाम, वर्ष और संस्थान — तीनों तालिका की तरह याद कीजिए।
इसरो के प्रमुख अभियान
| अभियान | वर्ष | उपलब्धि |
|---|---|---|
| चंद्रयान-1 | 2008 | चंद्रमा पर जल के अणुओं का संकेत |
| मंगलयान | 2013 में प्रक्षेपण | पहले ही प्रयास में मंगल कक्षा में पहुँचा |
| चंद्रयान-2 | 2019 | ऑर्बिटर सफल, लैंडर नहीं उतर सका |
| चंद्रयान-3 | 2023 | चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में सफल लैंडिंग |
| आदित्य-L1 | 2023 | सूर्य के अध्ययन के लिए पहला भारतीय मिशन |
मंगलयान की सबसे बड़ी बात यह थी कि भारत पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में पहुँचने वाला पहला देश बना। चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफल लैंडिंग की, जो पहले किसी देश ने नहीं की थी।
✗ चंद्रयान-2 पूरी तरह असफल रहा | ✓ उसका ऑर्बिटर सफल रहा और आज भी काम कर रहा है; केवल लैंडर नहीं उतर सका
चंद्रयान-3 से निकले दो नाम — यही ताज़ा हिस्सा है
- शिव शक्ति प्वाइंट — चंद्रयान-3 के लैंडिंग स्थल को दिया गया नाम।
- राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस — 23 अगस्त, उसी दिन लैंडिंग हुई थी।
ये दोनों 2023 के बाद के तथ्य हैं, इसलिए बाज़ार की अधिकांश पुरानी किताबों में हैं ही नहीं। सामान्य जागरूकता में यही अंतर अंक दिलाता है।
जानने योग्य संस्थान
| संस्थान | कार्य | मुख्यालय |
|---|---|---|
| ISRO | अंतरिक्ष अनुसंधान | बेंगलुरु |
| DRDO | रक्षा अनुसंधान | नई दिल्ली |
| CSIR | वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान | नई दिल्ली |
| ICAR | कृषि अनुसंधान | नई दिल्ली |
| BARC | परमाणु अनुसंधान | मुंबई |
इसरो की स्थापना 1969 में हुई और डॉ. विक्रम साराभाई को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक कहा जाता है। प्रक्षेपण केंद्र श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश में है।
इस विषय की तैयारी कैसे करें
- हर अभियान के साथ वर्ष और एक उपलब्धि जोड़कर याद कीजिए।
- पहली बार वाली उपलब्धियाँ अलग से लिखिए — प्रश्न प्रायः इन्हीं पर बनता है।
- संस्थानों को नाम, कार्य और मुख्यालय तीनों के साथ याद कीजिए।
- पिछले दो वर्ष की उपलब्धियों पर विशेष ध्यान दीजिए।
नए तथ्य वहीं से आते हैं जहाँ कुछ पहली बार हुआ हो। इसलिए तैयारी में यह पूछिए कि इस अभियान में पहली बार क्या हुआ — वही प्रश्न बनता है।
TRE संकेत: राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 23 अगस्त और शिव शक्ति प्वाइंट दो सबसे ताज़ा तथ्य हैं और पुरानी सामग्री में नहीं मिलेंगे — यहीं बढ़त है। मंगलयान पहले ही प्रयास में सफल तयशुदा प्रश्न है। और याद रखिए कि चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर सफल रहा, पूरा अभियान असफल नहीं था।
60 सेकंड का रिवीजन
- चंद्रयान-1 ने 2008 में चंद्रमा पर जल के संकेत दिए।
- मंगलयान से भारत पहले ही प्रयास में मंगल कक्षा में पहुँचने वाला पहला देश बना।
- चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर सफल रहा, केवल लैंडर नहीं उतर सका।
- चंद्रयान-3 ने 2023 में दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में सफल लैंडिंग की।
- लैंडिंग स्थल का नाम शिव शक्ति प्वाइंट; 23 अगस्त राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस।
- इसरो की स्थापना 1969; विक्रम साराभाई भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस कब मनाया जाता है?
23 अगस्त को, क्योंकि इसी दिन 2023 में चंद्रयान-3 ने चंद्रमा पर सफल लैंडिंग की थी। यह घोषणा उसी सफलता के बाद हुई, इसलिए यह तथ्य नया है और पुरानी किताबों में नहीं मिलता।
चंद्रयान-3 की लैंडिंग स्थल का नाम क्या है?
शिव शक्ति प्वाइंट। यह नाम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उस स्थान को दिया गया जहाँ विक्रम लैंडर उतरा था। दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में सफल लैंडिंग करने वाला भारत पहला देश बना, इसलिए यह उपलब्धि विशेष मानी जाती है।
मंगलयान की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या रही?
भारत पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में पहुँचने वाला पहला देश बना। यह अभियान कम लागत में पूरा हुआ, जिसकी दुनिया भर में चर्चा हुई। परीक्षा में प्रायः पहले ही प्रयास वाली यह बात ही पूछी जाती है।
क्या चंद्रयान-2 असफल अभियान था?
पूरी तरह नहीं। उसका ऑर्बिटर सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में स्थापित हुआ और आज भी आँकड़े भेज रहा है। केवल विक्रम लैंडर नियोजित ढंग से नहीं उतर सका। इसलिए उसे पूर्ण असफलता कहना ग़लत है और विकल्पों में यही जाल रखा जाता है।
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