शीर्षक, सारांश एवं भावार्थ लेखन
शीर्षक, सारांश एवं भावार्थ लेखन
इस विषय से 1 से 2 प्रश्न आते हैं और तीनों काम अलग-अलग हैं, यद्यपि सुनने में मिलते-जुलते लगते हैं। शीर्षक सबसे छोटा, सारांश उससे बड़ा और भावार्थ सबसे विस्तृत — यही क्रम याद रखिए, आधा उत्तर इसी से मिल जाता है।
तीनों में अंतर
| कार्य | लंबाई | क्या देना है |
|---|---|---|
| शीर्षक | दो से चार शब्द | केंद्रीय भाव का नाम |
| सारांश | मूल का लगभग एक तिहाई | मुख्य बातें, अपने शब्दों में |
| भावार्थ | मूल जितना या थोड़ा कम | भाव को खोलकर समझाना |
भेद यह है कि सारांश छोटा करता है और भावार्थ खोलता है। सारांश में विस्तार हटाया जाता है, भावार्थ में छिपा अर्थ स्पष्ट किया जाता है। यह अंतर सीधे पूछा जाता है।
✗ सारांश और भावार्थ एक ही चीज़ हैं | ✓ सारांश मूल को छोटा करता है; भावार्थ मूल के छिपे अर्थ को खोलकर समझाता है
शीर्षक कैसे चुनें
- पूरे अंश का केंद्रीय विषय एक वाक्य में तय कीजिए।
- उस वाक्य को दो से चार शब्दों में समेटिए।
- शीर्षक न बहुत सामान्य हो, न बहुत संकीर्ण।
- अंश में कोई बार-बार आने वाला शब्द हो तो प्रायः वही शीर्षक की कुंजी है।
अच्छे शीर्षक की कसौटी सरल है — शीर्षक पढ़कर अंदाज़ा लग जाए कि अंश किस बारे में है, पर पूरी बात न खुल जाए। बहुत लंबा शीर्षक और बहुत सामान्य शीर्षक, दोनों कमज़ोर माने जाते हैं।
सारांश लेखन के नियम
- मूल का लगभग एक तिहाई रखिए।
- अपने शब्दों में लिखिए, मूल वाक्य ज्यों के त्यों मत उठाइए।
- उदाहरण, दोहराव और अलंकार हटा दीजिए।
- क्रम मूल जैसा ही रखिए, आगे-पीछे मत कीजिए।
- अपनी राय मत जोड़िए — सारांश में लेखक की बात रहती है, आपकी नहीं।
अंतिम नियम सबसे अधिक टूटता है। सारांश में मूल्यांकन नहीं, संक्षेपण होता है — यह अच्छा है या बुरा, यह बताना सारांश का काम नहीं।
भावार्थ लेखन
भावार्थ में पंक्ति का छिपा अर्थ सरल भाषा में खोला जाता है। इसमें प्रतीक और अलंकार का अर्थ स्पष्ट करना पड़ता है। दीपक जलता रहा — इसका भावार्थ हो सकता है कि आशा बनी रही, यदि पूरे अंश में दीपक आशा का प्रतीक हो।
शिक्षक के लिए यह कौशल दोहरा उपयोगी है — कक्षा में बच्चों से सारांश लिखवाना पढ़ने की समझ जाँचने का सबसे सीधा तरीका है, इसलिए यह विषय पत्र में भी और कक्षा में भी काम आता है।
TRE संकेत: सारांश छोटा करता है, भावार्थ खोलता है — यह एक पंक्ति इस विषय के आधे प्रश्नों का उत्तर है। सारांश एक तिहाई और अपने शब्दों में दोनों नियम याद रखिए। शीर्षक में बार-बार आने वाला शब्द प्रायः कुंजी होता है, इसे पढ़ते समय ही पकड़ लीजिए।
60 सेकंड का रिवीजन
- शीर्षक दो से चार शब्दों में केंद्रीय भाव का नाम होता है।
- सारांश मूल का लगभग एक तिहाई और अपने शब्दों में होता है।
- भावार्थ मूल जितना रहकर छिपे अर्थ को खोलता है।
- सारांश छोटा करता है, भावार्थ खोलता है — यही मूल अंतर है।
- सारांश में अपनी राय या मूल्यांकन नहीं जोड़ा जाता।
- बार-बार आने वाला शब्द प्रायः शीर्षक की कुंजी होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सारांश और भावार्थ में क्या अंतर है?
सारांश मूल अंश को छोटा करता है और उसमें केवल मुख्य बातें अपने शब्दों में रह जाती हैं। भावार्थ मूल को छोटा नहीं करता, बल्कि उसमें छिपे अर्थ, प्रतीक और अलंकार को खोलकर सरल भाषा में समझाता है। एक संक्षेपण है, दूसरा व्याख्या।
सारांश कितना लंबा होना चाहिए?
मूल अंश का लगभग एक तिहाई। उदाहरण, दोहराव और अलंकार हटा दिए जाते हैं, केवल मुख्य विचार अपने शब्दों में रहते हैं। क्रम मूल जैसा ही रखा जाता है और लेखक की बात ही आती है, लिखने वाले की राय नहीं।
अच्छा शीर्षक कैसा होता है?
जो दो से चार शब्दों में केंद्रीय भाव बता दे — न इतना सामान्य कि कुछ स्पष्ट न हो, न इतना संकीर्ण कि पूरे अंश को न समेटे। पढ़ते समय जो शब्द बार-बार आता है, वह प्रायः शीर्षक की कुंजी होता है।
सारांश में अपनी राय क्यों नहीं जोड़नी चाहिए?
क्योंकि सारांश का काम संक्षेपण है, मूल्यांकन नहीं। उसमें लेखक ने जो कहा वही छोटा करके आना चाहिए। यह अच्छा है या बुरा, यह बताना समीक्षा का काम है और उसे सारांश में जोड़ने पर उत्तर नियम के विरुद्ध हो जाता है।
