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उपमा, रूपक एवं मानवीकरण

By ExamAtlas · 29/8/2026

उपमा, रूपक एवं मानवीकरण

अलंकार वाले प्रश्न में सबसे अधिक भूल इन्हीं तीन में होती है, क्योंकि तीनों तुलना पर टिके हैं और अंतर बहुत बारीक है। इसलिए इन्हें परिभाषा से नहीं, पहचान के एक सीधे नियम से याद कीजिए, तब विकल्प चुनना कठिन नहीं रह जाता।

तीनों की तुलना

अलंकारपहचानउदाहरण
उपमाas या like से खुली तुलनाHe is as brave as a lion
रूपकबिना as या like के सीधी तुलनाHe is a lion in battle
मानवीकरणनिर्जीव वस्तु मनुष्य जैसा व्यवहार करेThe wind whispered through the trees

पहचान का सबसे सरल नियम यही है — as या like दिखे तो उपमा, वही तुलना बिना इन शब्दों के हो तो रूपक, और यदि किसी निर्जीव वस्तु से मनुष्य जैसा काम कराया जा रहा हो तो मानवीकरण

जाल कहाँ है

हर as या like उपमा नहीं बनाता। जब तुलना एक ही वर्ग की दो चीज़ों के बीच हो तो वह अलंकार नहीं, साधारण तुलना है। इसलिए He runs like his brother में कोई उपमा नहीं है, क्योंकि दोनों मनुष्य हैं।

उपमा तब बनती है जब दो असमान वर्गों की चीज़ें तुलना में लाई जाएँ, जैसे मनुष्य और सिंह। यह बारीकी विकल्पों में जान-बूझकर रखी जाती है और यही सबसे अधिक अंक कटवाती है।

He runs like his brother में उपमा है  |   यह साधारण तुलना है, क्योंकि दोनों एक ही वर्ग के हैं; उपमा में असमान वस्तुओं की तुलना होती है

मानवीकरण और उसके पड़ोसी

मानवीकरण में निर्जीव वस्तु या अमूर्त भाव मनुष्य जैसा व्यवहार करता है — हवा फुसफुसाती है, सूरज मुस्कुराता है, मृत्यु दरवाज़े पर दस्तक देती है।

  • संबोधन में अनुपस्थित या निर्जीव वस्तु को सीधे पुकारा जाता है, जैसे O Death।
  • अन्योक्ति में पूरी रचना ही किसी दूसरे अर्थ की ओर संकेत करती है।
  • प्रतीक में कोई वस्तु किसी बड़े विचार का सूचक बन जाती है।

मानवीकरण और संबोधन का अंतर सीधा है — मानवीकरण में वस्तु काम करती है, जबकि संबोधन में उसे पुकारा जाता है। कई पंक्तियों में दोनों साथ भी मिल जाते हैं।

प्रश्न किस रूप में आता है

  1. एक पंक्ति देकर अलंकार का नाम पूछा जाता है।
  2. अलंकार का नाम देकर सही उदाहरण चुनवाया जाता है।
  3. परिभाषा देकर अलंकार पूछा जाता है।
  4. चार पंक्तियाँ देकर पूछा जाता है कि किसमें अमुक अलंकार नहीं है।

चौथा प्रारूप सबसे कठिन है, क्योंकि उसमें तीन पंक्तियों में एक ही अलंकार होता है और चौथी अलग होती है। ऐसे प्रश्न में हर पंक्ति पर अलग से नियम लगाइए, तुलना करके मत चलिए।

तीनों को एक ही वाक्य में याद कीजिए — उपमा कहती है कि वह सिंह जैसा है, रूपक कहता है कि वह सिंह है, और मानवीकरण में सिंह की जगह हवा भी बात कर सकती है।

TRE संकेत: उपमा और रूपक का अंतर लगभग हर बार आता है। एक ही वर्ग की तुलना उपमा नहीं होती वाली बारीकी भी पूछी जाती रही है। मानवीकरण और संबोधन का अंतर भी सीधे आया है।

60 सेकंड का रिवीजन

  • उपमा में as या like से खुली तुलना होती है।
  • रूपक में तुलना बिना as या like के सीधे की जाती है।
  • मानवीकरण में निर्जीव वस्तु मनुष्य जैसा व्यवहार करती है।
  • एक ही वर्ग की दो चीज़ों की तुलना उपमा नहीं मानी जाती।
  • संबोधन में निर्जीव वस्तु को सीधे पुकारा जाता है।
  • हर पंक्ति पर अलग से नियम लगाइए, तुलना करके मत चलिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपमा और रूपक में क्या अंतर है?

दोनों में तुलना होती है, पर उपमा में वह खुली रहती है और as या like जैसे शब्दों से दिखाई देती है, जैसे He is as brave as a lion। रूपक में तुलना छिपी होती है और एक वस्तु को सीधे दूसरी कह दिया जाता है, जैसे He is a lion in battle। रूपक अधिक प्रभावशाली माना जाता है।

क्या हर as या like वाला वाक्य उपमा है?

नहीं। यदि तुलना एक ही वर्ग की दो चीज़ों के बीच हो तो वह साधारण तुलना है, अलंकार नहीं। He runs like his brother में दोनों मनुष्य हैं, इसलिए वहाँ उपमा नहीं है। उपमा तब बनती है जब असमान वर्गों की चीज़ें तुलना में लाई जाएँ, जैसे मनुष्य और सिंह।

मानवीकरण कैसे पहचानें?

देखिए कि क्या कोई निर्जीव वस्तु या अमूर्त भाव ऐसा काम कर रहा है जो केवल मनुष्य कर सकता है — बोलना, हँसना, रोना, दस्तक देना। हवा का फुसफुसाना और सूरज का मुस्कुराना इसी के उदाहरण हैं। यदि वस्तु केवल पुकारी जा रही हो, काम न कर रही हो, तो वह संबोधन है।

एक पंक्ति में दो अलंकार हो सकते हैं?

हाँ, यह सामान्य बात है। कोई पंक्ति एक साथ मानवीकरण और अनुप्रास दोनों दिखा सकती है, या रूपक और अतिशयोक्ति दोनों। ऐसे प्रश्न में देखिए कि विकल्पों में क्या दिया गया है और पंक्ति का मुख्य प्रभाव किस अलंकार से बन रहा है, वही उत्तर होगा।