साधारण ब्याज एवं चक्रवृद्धि ब्याज
Simple Interest and Compound Interest
ब्याज से 2 प्रश्न तक आते हैं और दोनों प्रकार का अंतर ही अधिकांश सवालों का आधार है। सूत्र कम हैं, पर उनके बीच के रिश्ते अधिक पूछे जाते हैं, इसलिए केवल सूत्र नहीं, तुलना भी याद रखनी चाहिए।
साधारण ब्याज
साधारण ब्याज = (मूलधन × दर × समय) ÷ 100
मिश्रधन = मूलधन + ब्याज
साधारण ब्याज में हर वर्ष ब्याज केवल मूलधन पर लगता है, इसलिए वह हर वर्ष बराबर रहता है। यही कारण है कि साधारण ब्याज में राशि रैखिक रूप से बढ़ती है।
एक तयशुदा प्रकार — कोई राशि कितने वर्षों में दोगुनी हो जाएगी। साधारण ब्याज में राशि दोगुनी होने का अर्थ है ब्याज मूलधन के बराबर हो जाना, इसलिए समय = 100 ÷ दर। तिगुनी होने पर 200 ÷ दर।
✗ 10% साधारण ब्याज पर राशि 5 वर्ष में दोगुनी होगी | ✓ दोगुनी होने में 100 ÷ 10 यानी 10 वर्ष लगेंगे
चक्रवृद्धि ब्याज
मिश्रधन = मूलधन × (1 + दर/100)^समय
चक्रवृद्धि ब्याज = मिश्रधन − मूलधन
यहाँ ब्याज मूलधन और पिछले ब्याज दोनों पर लगता है, इसलिए राशि हर वर्ष तेज़ी से बढ़ती है। यदि ब्याज अर्धवार्षिक लगे तो दर आधी और समय दोगुना कर दीजिए; त्रैमासिक में दर चौथाई और समय चौगुना।
दोनों की तुलना
| बिंदु | साधारण | चक्रवृद्धि |
|---|---|---|
| आधार | केवल मूलधन | मूलधन + पिछला ब्याज |
| हर वर्ष ब्याज | बराबर | बढ़ता हुआ |
| पहला वर्ष | दोनों बराबर | दोनों बराबर |
| वृद्धि | रैखिक | चक्रवृद्धि |
तीसरी पंक्ति सबसे अधिक पूछी जाती है — पहले वर्ष दोनों ब्याज बराबर होते हैं, क्योंकि तब तक ब्याज पर ब्याज लगा ही नहीं होता। अंतर दूसरे वर्ष से शुरू होता है।
2 वर्ष का अंतर = मूलधन × (दर ÷ 100)²
3 वर्ष का अंतर = मूलधन × (दर ÷ 100)² × (3 + दर/100)
दो वर्ष वाला सूत्र सबसे अधिक काम आता है और उससे तीन मान देकर चौथा पूछा जाता है।
किस्तें एवं बराबर भुगतान
किस्त वाले सवाल में विचार यही है कि हर किस्त का वर्तमान मूल्य निकालकर जोड़ने पर वह उधार ली गई राशि के बराबर होना चाहिए। साधारण ब्याज में हर किस्त पर उतने ही वर्ष का ब्याज जुड़ता है जितने वर्ष वह जमा रही।
इसलिए तीन वर्ष की तीन बराबर किस्तों में पहली किस्त पर दो वर्ष, दूसरी पर एक वर्ष और तीसरी पर शून्य वर्ष का ब्याज लगता है। यही क्रम याद रखने पर ऐसे सवाल सीधे हल हो जाते हैं।
ब्याज के सवाल में सबसे पहले यह देखिए कि साधारण है या चक्रवृद्धि, और फिर यह कि अवधि वार्षिक है या अर्धवार्षिक। ये दो बातें तय हो जाएँ तो सूत्र अपने आप चुन लिया जाता है।
TRE संकेत: पहले वर्ष दोनों ब्याज बराबर तयशुदा प्रश्न है। दो वर्ष का अंतर = मूलधन × (दर/100)² याद रखिए, इससे कई सवाल सीधे बनते हैं। दोगुनी होने में 100 ÷ दर वर्ष साधारण ब्याज का सबसे आम प्रकार है। अर्धवार्षिक में दर आधी, समय दोगुना करना मत भूलिए।
60 सेकंड का रिवीजन
- साधारण ब्याज केवल मूलधन पर लगता है और हर वर्ष बराबर रहता है।
- चक्रवृद्धि में ब्याज पिछले ब्याज पर भी लगता है।
- पहले वर्ष दोनों प्रकार का ब्याज बराबर होता है।
- दो वर्ष का अंतर मूलधन गुणा दर बटा सौ का वर्ग होता है।
- साधारण ब्याज में राशि 100 ÷ दर वर्षों में दोगुनी होती है।
- अर्धवार्षिक में दर आधी और समय दोगुना कर दीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
साधारण और चक्रवृद्धि ब्याज में अंतर कब से दिखता है?
दूसरे वर्ष से। पहले वर्ष दोनों बराबर होते हैं, क्योंकि तब तक ब्याज पर ब्याज लगा ही नहीं होता। दूसरे वर्ष से चक्रवृद्धि में पिछला ब्याज मूलधन में जुड़ जाता है, इसलिए वहीं से अंतर बनना शुरू होता है और आगे बढ़ता जाता है।
साधारण ब्याज पर राशि कितने वर्षों में दोगुनी होती है?
सौ बटा दर वर्षों में। दस प्रतिशत की दर पर यह दस वर्ष होगा, पाँच प्रतिशत पर बीस वर्ष। तिगुनी होने में दो सौ बटा दर वर्ष लगते हैं, क्योंकि तब ब्याज मूलधन का दोगुना होना चाहिए।
अर्धवार्षिक चक्रवृद्धि में सूत्र कैसे बदलता है?
दर आधी कर दी जाती है और समय दोगुना, क्योंकि एक वर्ष में दो बार ब्याज जुड़ता है। त्रैमासिक हो तो दर चौथाई और समय चौगुना कर दिया जाता है। मूल सूत्र वही रहता है, केवल दर और समय के मान बदलते हैं।
किस्तों वाले सवाल का मूल विचार क्या है?
हर किस्त का वर्तमान मूल्य निकालकर जोड़ने पर वह उधार ली गई राशि के बराबर होना चाहिए। साधारण ब्याज में पहली किस्त सबसे अधिक समय जमा रहती है, इसलिए उस पर सबसे अधिक ब्याज जुड़ता है, और अंतिम किस्त पर कोई ब्याज नहीं लगता।
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