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सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलन

Social and Religious Reform Movements

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सुधार आंदोलनों से प्रश्न प्रायः दो तरह से आते हैं — किस सुधारक ने कौन-सी संस्था बनाई, और कौन-सा कानून किस वर्ष आया। दोनों तालिका के रूप में याद कीजिए, क्योंकि विकल्पों में नाम और संस्थाएँ आपस में बदल दी जाती हैं।

बंगाल के सुधारक

राजा राममोहन राय को आधुनिक भारत का जनक कहा जाता है। उन्होंने 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की और 1829 में सती प्रथा पर रोक लगवाने में निर्णायक भूमिका निभाई, जिसे लॉर्ड विलियम बेंटिक ने कानून बनाया।

सुधारकसंस्था या कार्य
राजा राममोहन रायब्रह्म समाज; सती प्रथा विरोध
ईश्वरचंद्र विद्यासागरविधवा पुनर्विवाह; स्त्री शिक्षा
देवेंद्रनाथ ठाकुरब्रह्म समाज का विस्तार
केशवचंद्र सेनब्रह्म समाज की नई शाखा

ईश्वरचंद्र विद्यासागर के प्रयासों से 1856 में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम बना। उन्होंने स्त्री शिक्षा के लिए अनेक विद्यालय खोले और संस्कृत के प्रकांड विद्वान होते हुए भी परंपरा की रूढ़ियों से लड़े।

बंगाल से बाहर

सुधारकसंस्थाक्षेत्र
दयानंद सरस्वतीआर्य समाज, 1875पंजाब और उत्तर भारत
ज्योतिबा फुलेसत्यशोधक समाजमहाराष्ट्र
स्वामी विवेकानंदरामकृष्ण मिशन, 1897बंगाल और देश भर
सैयद अहमद ख़ाँअलीगढ़ आंदोलनउत्तर प्रदेश
एनी बेसेंटथियोसोफ़िकल सोसाइटीअड्यार, मद्रास

दयानंद सरस्वती ने वेदों की ओर लौटने का नारा दिया और मूर्तिपूजा तथा जाति भेद का विरोध किया। ज्योतिबा फुले ने शिक्षा को सामाजिक बदलाव का मुख्य साधन माना और लड़कियों के लिए विद्यालय खोले।

स्वामी विवेकानंद ने 1893 में शिकागो की विश्व धर्म संसद में भाषण दिया और भारतीय विचार को विश्व मंच पर रखा। रामकृष्ण मिशन ने सेवा को धर्म का व्यावहारिक रूप बनाया।

✗ आर्य समाज की स्थापना राजा राममोहन राय ने की  |  ✓ ब्रह्म समाज राजा राममोहन राय ने और आर्य समाज दयानंद सरस्वती ने स्थापित किया

सुधारकों में साझा क्या था

  • सबने तर्क और विवेक को धार्मिक प्रश्नों पर लागू किया।
  • सबने स्त्री शिक्षा को केंद्रीय माना।
  • सबने जाति भेद और अंधविश्वास का विरोध किया।
  • सबने आधुनिक शिक्षा को आवश्यक बताया, यद्यपि उसके रूप पर मतभेद रहे।
  • सबने अपनी परंपरा को पूरी तरह अस्वीकार नहीं किया, बल्कि उसका शुद्ध रूप खोजा।

यही आख़िरी बिंदु सबसे महत्वपूर्ण है — सुधारक पश्चिम की नकल नहीं कर रहे थे, वे अपनी परंपरा के भीतर से ही सुधार का आधार खोज रहे थे। यह बात परीक्षा में कथन के रूप में आती है।

जो कानून बने

कानूनवर्ष
सती प्रथा निषेध1829
विधवा पुनर्विवाह अधिनियम1856
बाल विवाह निरोधक अधिनियम1929
दास प्रथा उन्मूलन1843

इन तिथियों में 1829 और 1856 सबसे अधिक पूछी जाती हैं। ध्यान दीजिए कि कानून बन जाना और प्रथा समाप्त हो जाना दो अलग बातें हैं — कानून ने सुधार को कानूनी सहारा दिया, पर बदलाव धीरे-धीरे ही आया।

सुधारक और संस्था की जोड़ी बनाकर याद कीजिए, और उसके साथ एक कानून या एक विशिष्ट काम जोड़ दीजिए। राममोहन के साथ सती, विद्यासागर के साथ विधवा पुनर्विवाह, दयानंद के साथ वेदों की ओर लौटो।

TRE संकेत: ब्रह्म समाज राममोहन और आर्य समाज दयानंद वाली जोड़ी लगभग हर बार आती है। 1829 सती प्रथा निषेध भी तयशुदा है। विद्यासागर और विधवा पुनर्विवाह तथा विवेकानंद का शिकागो भाषण भी सीधे पूछे गए हैं।

60 सेकंड का रिवीजन

  • राजा राममोहन राय ने 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की।
  • सती प्रथा पर 1829 में बेंटिक के समय रोक लगी।
  • विद्यासागर के प्रयासों से 1856 में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम बना।
  • दयानंद सरस्वती ने 1875 में आर्य समाज की स्थापना की।
  • ज्योतिबा फुले ने सत्यशोधक समाज बनाया और स्त्री शिक्षा पर बल दिया।
  • विवेकानंद ने 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुधार आंदोलनों में सबसे साझा बात क्या थी?

सबने धार्मिक और सामाजिक प्रश्नों पर तर्क तथा विवेक लागू किया और अंधविश्वास का विरोध किया। सबने स्त्री शिक्षा को केंद्रीय माना और जाति भेद के विरुद्ध बात की। और सबसे महत्वपूर्ण यह कि उन्होंने अपनी परंपरा को पूरी तरह अस्वीकार नहीं किया, बल्कि उसी के भीतर से सुधार का आधार खोजा।

ब्रह्म समाज और आर्य समाज में क्या अंतर है?

ब्रह्म समाज की स्थापना 1828 में राजा राममोहन राय ने बंगाल में की और उसने एकेश्वरवाद तथा मूर्तिपूजा के विरोध पर बल दिया। आर्य समाज की स्थापना 1875 में दयानंद सरस्वती ने की और उसका नारा था वेदों की ओर लौटो। दोनों के नाम और संस्थापक विकल्पों में आपस में बदले जाते हैं।

सती प्रथा कब और कैसे बंद हुई?

1829 में, जब लॉर्ड विलियम बेंटिक ने इसे कानूनन अपराध घोषित किया। इसमें राजा राममोहन राय की भूमिका निर्णायक थी, जिन्होंने वर्षों तक इसके विरुद्ध अभियान चलाया और शास्त्रों से भी तर्क दिए। कानून बनने के बाद भी प्रथा तुरंत समाप्त नहीं हुई, पर उसे कानूनी सहारा मिलना बंद हो गया।

ज्योतिबा फुले का क्या योगदान है?

उन्होंने महाराष्ट्र में सत्यशोधक समाज की स्थापना की और शिक्षा को सामाजिक बदलाव का सबसे बड़ा साधन माना। उन्होंने लड़कियों और वंचित वर्गों के लिए विद्यालय खोले, जो उस समय अत्यंत साहसी कदम था। उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले ने भी इस काम में बराबर की भूमिका निभाई।

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Social and Religious Reform | BPSC TRE 4.0 Part-III — ExamAtlas