पादपों की संरचना: जड़, तना, पत्ती, पुष्प
पादपों की संरचना: जड़, तना, पत्ती, पुष्प
इस भाग से प्रश्न प्रायः दो तरह से आता है — किसी अंग का कार्य पूछा जाता है, या पुष्प के किसी भाग का नाम पूछा जाता है। संरचना का चित्र मन में बना लेने पर यह पूरा भाग अपने आप याद रह जाता है, रटने की ज़रूरत कम पड़ती है।
जड़ और तना
| वर्ग | बनावट | उदाहरण |
|---|---|---|
| मूसला जड़ | एक मुख्य मोटी जड़ और उससे निकली शाखाएँ | सरसों, चना, आम, नीम |
| रेशेदार जड़ | एक जैसी अनेक पतली जड़ें | गेहूँ, धान, घास, मक्का |
जड़ का काम है पौधे को मिट्टी में जमाए रखना और जल तथा खनिज सोखना। कुछ जड़ें भोजन भी संचित करती हैं, जैसे गाजर, मूली, शकरकंद और शलजम।
तना पौधे को सहारा देता है और जड़ से आया जल पत्तियों तक तथा पत्तियों में बना भोजन बाकी भागों तक पहुँचाता है। आलू, अदरक और हल्दी जड़ नहीं बल्कि रूपांतरित तने हैं — यह भ्रम परीक्षा में जान-बूझकर बनाया जाता है।
✗ आलू एक जड़ है | ✓ आलू भूमिगत रूपांतरित तना है; उस पर आँखें यानी कलिकाएँ होती हैं जो जड़ में नहीं होतीं
पत्ती
पत्ती का मुख्य काम प्रकाश संश्लेषण है और उसका हरा रंग पर्णहरित के कारण होता है। पत्ती की सतह पर छोटे-छोटे छिद्र होते हैं जिन्हें रंध्र कहते हैं।
- रंध्र से गैसों का आदान-प्रदान होता है।
- अतिरिक्त जल वाष्पोत्सर्जन के रूप में इन्हीं से बाहर निकलता है।
- पत्तियों में शिराओं की व्यवस्था शिराविन्यास कहलाती है, जो जालिकावत या समांतर होती है।
शिराविन्यास और जड़ का प्रकार आपस में जुड़े हैं — जालिकावत शिराविन्यास वाले पौधों में मूसला जड़ और समांतर शिराविन्यास वालों में रेशेदार जड़ होती है। यह संबंध परीक्षा में सीधे पूछा जाता है।
पुष्प और उसके भाग
| भाग | कार्य |
|---|---|
| बाह्यदल | कली की अवस्था में पुष्प की रक्षा |
| दल | रंगीन भाग, कीटों को आकर्षित करता है |
| पुंकेसर | नर भाग; परागकण बनाता है |
| स्त्रीकेसर | मादा भाग; अंडाशय इसी में होता है |
पुंकेसर के ऊपरी भाग को परागकोश कहते हैं, जिसमें परागकण बनते हैं। स्त्रीकेसर के तीन भाग होते हैं — वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय। परागकण का वर्तिकाग्र तक पहुँचना परागण कहलाता है और उसके बाद निषेचन होता है।
निषेचन के बाद अंडाशय फल में और बीजांड बीज में बदल जाता है। यह जोड़ी बहुत बार पूछी गई है।
पौधे के अंगों को उनके काम से जोड़कर याद कीजिए — जड़ सोखती है, तना पहुँचाता है, पत्ती बनाती है और पुष्प प्रजनन करता है। हर प्रश्न इसी चार-सूत्री ढाँचे में बैठ जाता है।
TRE संकेत: आलू और अदरक रूपांतरित तने हैं — यह सबसे प्रिय जाल है। अंडाशय से फल और बीजांड से बीज बनता है, यह लगभग तय प्रश्न है। जालिकावत शिराविन्यास के साथ मूसला जड़ वाला संबंध भी सीधे पूछा जाता है।
60 सेकंड का रिवीजन
- मूसला जड़ सरसों-चना में और रेशेदार जड़ गेहूँ-धान में होती है।
- गाजर और मूली संचयी जड़ें हैं, जबकि आलू और अदरक रूपांतरित तने हैं।
- पत्ती में प्रकाश संश्लेषण होता है और उसका हरा रंग पर्णहरित से है।
- रंध्र से गैस विनिमय तथा वाष्पोत्सर्जन होता है।
- पुंकेसर नर और स्त्रीकेसर मादा जनन भाग है।
- निषेचन के बाद अंडाशय फल और बीजांड बीज बन जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आलू जड़ क्यों नहीं, तना है?
क्योंकि आलू पर आँखें दिखाई देती हैं, जो वास्तव में कलिकाएँ हैं और उनसे नया पौधा निकल आता है। कलिकाएँ केवल तने पर बनती हैं, जड़ पर नहीं। आलू भूमि के नीचे भोजन संचित करने वाला रूपांतरित तना है, इसी तरह अदरक और हल्दी भी तने ही हैं।
रंध्र का क्या काम है?
रंध्र पत्ती की सतह पर बने सूक्ष्म छिद्र हैं और उनके दोनों ओर द्वार कोशिकाएँ होती हैं जो उन्हें खोलती-बंद करती हैं। इनसे प्रकाश संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड भीतर आती है, ऑक्सीजन बाहर जाती है और अतिरिक्त जल वाष्प बनकर निकलता है।
परागण और निषेचन में क्या अंतर है?
परागण में परागकण पुंकेसर के परागकोश से निकलकर स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं, और यह काम हवा, पानी, कीट या पक्षी करते हैं। निषेचन उसके बाद की क्रिया है, जिसमें नर युग्मक और मादा युग्मक आपस में मिलते हैं। परागण पहले होता है, निषेचन उसके बाद।
मूसला और रेशेदार जड़ की पहचान कैसे करें?
पत्ती देखकर अनुमान लगाया जा सकता है। जिन पौधों की पत्तियों में शिराएँ जाल की तरह फैली हों, उनमें मूसला जड़ होती है, जैसे आम और सरसों में। जिनकी पत्तियों में शिराएँ समांतर चलती हों, उनमें रेशेदार जड़ होती है, जैसे घास, गेहूँ और मक्का में।
