संश्लेषित रेशे एवं प्लास्टिक
Synthetic Fibres and Plastics
यह अध्याय सबसे व्यावहारिक है और इससे प्रश्न प्रायः दो बिंदुओं पर आता है — कौन-सा रेशा किस काम में आता है, और प्लास्टिक के पर्यावरणीय प्रभाव। नाम और उपयोग की जोड़ी बना लीजिए, यही पूरे अध्याय का सार है।
प्राकृतिक और संश्लेषित रेशे
| वर्ग | रेशे | स्रोत |
|---|---|---|
| प्राकृतिक | कपास, जूट, ऊन, रेशम | पौधे और जंतु |
| संश्लेषित | रेयॉन, नाइलॉन, पॉलिएस्टर, ऐक्रिलिक | रासायनिक विधि से बने |
रेयॉन कुछ अलग है — वह लकड़ी की लुगदी से बनता है, इसलिए उसे अर्ध-संश्लेषित या कृत्रिम रेशम कहा जाता है। नाइलॉन पहला पूर्णतः संश्लेषित रेशा था और वह इतना मज़बूत होता है कि उसका बना रस्सा इस्पात के तार जैसी ताक़त रखता है।
| रेशा | उपयोग |
|---|---|
| नाइलॉन | पैराशूट, मछली पकड़ने का जाल, रस्सी, ब्रश, मोज़े |
| पॉलिएस्टर | टेरीलीन कपड़ा, पीईटी बोतल |
| ऐक्रिलिक | कृत्रिम ऊन, स्वेटर, कंबल |
| रेयॉन | सर्जिकल पट्टी, कालीन, कपास के साथ मिश्रण |
संश्लेषित रेशे क्यों प्रयोग होते हैं
- वे मज़बूत और टिकाऊ होते हैं।
- कम सिकुड़ते हैं और जल्दी सूख जाते हैं।
- सस्ते होते हैं और आसानी से बड़ी मात्रा में बनाए जा सकते हैं।
- उनमें कीड़े नहीं लगते, जबकि ऊनी कपड़ों में लगते हैं।
पर एक बड़ी सावधानी है — संश्लेषित रेशे आग पकड़ने पर पिघलकर त्वचा से चिपक जाते हैं। इसीलिए रसोई में काम करते समय या अग्निशमन कर्मियों के लिए सूती कपड़े अधिक सुरक्षित माने जाते हैं। यह बिंदु परीक्षा में सीधे पूछा जाता है।
प्लास्टिक
| वर्ग | गुण | उदाहरण |
|---|---|---|
| तापसुनम्य | गर्म करने पर मुड़ जाता है, दोबारा ढाला जा सकता है | पॉलिथीन, पीवीसी |
| तापदृढ़ | एक बार ढलने पर दोबारा नहीं ढलता | बैकेलाइट, मेलामाइन |
बैकेलाइट ऊष्मा और विद्युत की कुचालक है, इसीलिए बिजली के स्विच और बर्तनों के हत्थे उसी से बनते हैं। मेलामाइन आग रोक सकती है, इसलिए उससे रसोई के बर्तन और अग्निरोधी वर्दी बनाई जाती है। टेफ़लॉन पर चिकनाई नहीं चिपकती, इसलिए वह नॉन-स्टिक बर्तनों पर चढ़ाया जाता है।
प्लास्टिक हल्का, टिकाऊ, जंगरोधी और कुचालक होता है, इसीलिए वह जल भंडारण, पैकिंग, चिकित्सा उपकरण और अंतरिक्ष यान तक में काम आता है।
✗ सभी प्लास्टिक गर्म करने पर दोबारा ढाले जा सकते हैं | ✓ केवल तापसुनम्य प्लास्टिक दोबारा ढलते हैं; बैकेलाइट जैसे तापदृढ़ प्लास्टिक नहीं
प्लास्टिक और पर्यावरण
प्लास्टिक अजैव निम्नीकरणीय है, यानी वह मिट्टी में सड़ता नहीं और वर्षों तक बना रहता है। जलाने पर वह विषैली गैसें छोड़ता है, नालियाँ जाम कर देता है और उसे निगलने से गाय तथा समुद्री जीव मर जाते हैं।
समाधान का सूत्र चार आर है — कम उपयोग, दोबारा उपयोग, पुनर्चक्रण और मरम्मत। बाज़ार जाते समय कपड़े का थैला ले जाना और खाद्य पदार्थ को पुनर्चक्रित प्लास्टिक में न रखना दो सबसे व्यावहारिक आदतें हैं।
रेशे और प्लास्टिक दोनों में एक ही तर्क काम करता है — जो गुण उन्हें उपयोगी बनाता है, वही गुण उन्हें पर्यावरण के लिए समस्या बना देता है। टिकाऊपन इसीलिए वरदान भी है और अभिशाप भी।
TRE संकेत: रेयॉन लकड़ी की लुगदी से बनता है — यह सबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य है। बैकेलाइट विद्युत की कुचालक है इसलिए स्विच उसी के बनते हैं, यह भी तय है। टेफ़लॉन नॉन-स्टिक बर्तनों पर और प्लास्टिक अजैव निम्नीकरणीय है — दोनों सीधे आ चुके हैं।
60 सेकंड का रिवीजन
- रेयॉन लकड़ी की लुगदी से बनता है और उसे कृत्रिम रेशम कहते हैं।
- नाइलॉन पहला पूर्णतः संश्लेषित रेशा था और बहुत मज़बूत होता है।
- संश्लेषित रेशे आग में पिघलकर त्वचा से चिपक जाते हैं।
- तापसुनम्य प्लास्टिक दोबारा ढाला जा सकता है, तापदृढ़ नहीं।
- बैकेलाइट कुचालक है और मेलामाइन आग रोक सकती है।
- प्लास्टिक अजैव निम्नीकरणीय है; समाधान चार आर के सूत्र में है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रसोई में सूती कपड़े क्यों बेहतर माने जाते हैं?
संश्लेषित रेशे आग के संपर्क में आने पर जलने के बजाय पिघलने लगते हैं और पिघला हुआ पदार्थ त्वचा से चिपक जाता है, जिससे गहरा घाव बनता है। सूती कपड़ा जल तो जाता है पर पिघलकर चिपकता नहीं। इसीलिए रसोई और अग्निशमन जैसे कामों में सूती कपड़े की सलाह दी जाती है।
रेयॉन को संश्लेषित रेशा क्यों नहीं माना जाता?
क्योंकि उसका कच्चा माल पूरी तरह रासायनिक नहीं है। रेयॉन लकड़ी की लुगदी यानी प्राकृतिक सेलुलोस से रासायनिक क्रिया के बाद बनाया जाता है, इसलिए उसे अर्ध-संश्लेषित या कृत्रिम रेशम कहा जाता है। नाइलॉन और पॉलिएस्टर पूरी तरह रसायनों से बनते हैं, इसलिए वे पूर्णतः संश्लेषित हैं।
बिजली के स्विच बैकेलाइट के ही क्यों बनते हैं?
बैकेलाइट ऊष्मा और विद्युत दोनों की कुचालक है, इसलिए वह धारा को बाहर नहीं आने देती और छूने पर झटका नहीं लगता। साथ ही वह तापदृढ़ प्लास्टिक है, इसलिए गर्म होने पर भी अपना आकार नहीं खोती। इन्हीं दोनों गुणों के कारण स्विच, प्लग और बर्तनों के हत्थे उसी से बनाए जाते हैं।
प्लास्टिक कचरे की समस्या का व्यावहारिक हल क्या है?
सबसे प्रभावी उपाय उपयोग घटाना है, क्योंकि जो प्लास्टिक बना ही नहीं, उसका कचरा भी नहीं होगा। इसके बाद दोबारा उपयोग, पुनर्चक्रण और मरम्मत आते हैं। बाज़ार में कपड़े का थैला ले जाना, बोतलें दोबारा भरना और प्लास्टिक को जलाने के बजाय अलग करके पुनर्चक्रण में भेजना रोज़मर्रा के ठोस कदम हैं।
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