वैदिक काल
The Vedic Period
वैदिक काल से प्रश्न प्रायः दो तरह से आते हैं — किस वेद की क्या विशेषता है, और पूर्व वैदिक तथा उत्तर वैदिक काल में क्या अंतर आया। दोनों बिंदु तालिका के रूप में याद कीजिए, क्योंकि विकल्पों में इन्हें आपस में बदलकर पूछा जाता है।
चार वेद
| वेद | विषय | विशेष तथ्य |
|---|---|---|
| ऋग्वेद | देवताओं की स्तुति | सबसे प्राचीन; गायत्री मंत्र इसी में |
| सामवेद | गायन योग्य मंत्र | भारतीय संगीत का मूल |
| यजुर्वेद | यज्ञ की विधियाँ | गद्य और पद्य दोनों में |
| अथर्ववेद | औषधि, जादू, लोक जीवन | सबसे बाद का वेद |
ऋग्वेद सबसे प्राचीन ग्रंथ है और उसमें दस मंडल हैं। गायत्री मंत्र उसके तीसरे मंडल में है और वह सूर्य देवता सवितृ को समर्पित है। पुरुष सूक्त, जिसमें वर्ण व्यवस्था का पहला उल्लेख मिलता है, दसवें मंडल में है।
वेदों के बाद ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषद आते हैं। उपनिषदों को वेदांत कहा जाता है और सत्यमेव जयते मुंडक उपनिषद से लिया गया है, जो भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य है।
पूर्व वैदिक समाज
- समाज कबीलाई था और उसका मुखिया राजन कहलाता था।
- गाय संपत्ति की मुख्य इकाई थी; युद्ध को गविष्टि यानी गायों की खोज कहा जाता था।
- सभा और समिति नामक संस्थाएँ राजा को सलाह देती थीं।
- स्त्रियों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर थी; गार्गी, लोपामुद्रा और अपाला जैसे नाम मिलते हैं।
- वर्ण व्यवस्था कर्म आधारित थी, जन्म आधारित नहीं।
उत्तर वैदिक काल का बदलाव
| बिंदु | पूर्व वैदिक | उत्तर वैदिक |
|---|---|---|
| अर्थव्यवस्था | पशुपालन प्रधान | कृषि प्रधान |
| राजनीति | कबीला | जनपद और राज्य |
| वर्ण | कर्म आधारित | जन्म आधारित होने लगा |
| देवता | इंद्र, अग्नि, वरुण | प्रजापति, विष्णु, रुद्र |
| धातु | ताँबा | लोहा का प्रयोग शुरू |
| स्त्री | सभा में भागीदारी | स्थिति में गिरावट |
सबसे बड़ा बदलाव लोहे के प्रयोग से आया, क्योंकि उसी से घने जंगल साफ़ करके गंगा घाटी में खेती संभव हुई। इसी बदलाव ने कबीले को राज्य में बदल दिया।
✗ वर्ण व्यवस्था आरंभ से ही जन्म आधारित थी | ✓ पूर्व वैदिक काल में वह कर्म आधारित थी; जन्म आधारित होना उत्तर वैदिक काल में शुरू हुआ
यह सब कहाँ हुआ
पूर्व वैदिक काल का क्षेत्र मुख्यतः सप्त सिंधु यानी आज का पंजाब और उसके आसपास का इलाका था। उत्तर वैदिक काल में विस्तार गंगा-यमुना के दोआब और उससे आगे पूर्व की ओर हुआ।
यही पूर्व की ओर बढ़ना आगे चलकर मगध के उदय की पृष्ठभूमि बना, इसलिए बिहार के लिए यह क्रम विशेष महत्व रखता है।
दोनों कालों का अंतर याद रखने का सरल सूत्र यह है — पूर्व वैदिक में गाय केंद्र में थी और उत्तर वैदिक में भूमि। अर्थव्यवस्था के इसी बदलाव से बाकी सारे बदलाव निकलते हैं।
TRE संकेत: गायत्री मंत्र ऋग्वेद में है — यह लगभग तय प्रश्न है। सामवेद संगीत का मूल और सत्यमेव जयते मुंडक उपनिषद से भी सीधे पूछे जाते हैं। उत्तर वैदिक काल में लोहे का प्रयोग भी बार-बार आया है।
60 सेकंड का रिवीजन
- ऋग्वेद सबसे प्राचीन वेद है और उसमें दस मंडल हैं।
- गायत्री मंत्र ऋग्वेद के तीसरे मंडल में है।
- सामवेद को भारतीय संगीत का मूल माना जाता है।
- सत्यमेव जयते मुंडक उपनिषद से लिया गया है।
- पूर्व वैदिक अर्थव्यवस्था पशुपालन और उत्तर वैदिक कृषि प्रधान थी।
- उत्तर वैदिक काल में लोहे का प्रयोग शुरू हुआ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गायत्री मंत्र कहाँ से लिया गया है?
ऋग्वेद के तीसरे मंडल से। यह सूर्य से जुड़े देवता सवितृ को समर्पित है और वैदिक साहित्य का सबसे प्रसिद्ध मंत्र माना जाता है। परीक्षा में इसे किसी दूसरे वेद के साथ जोड़कर पूछा जाता है, इसलिए ऋग्वेद वाला संबंध पक्का रखिए।
पूर्व और उत्तर वैदिक काल में सबसे बड़ा अंतर क्या था?
अर्थव्यवस्था का। पूर्व वैदिक काल पशुपालन प्रधान था और गाय संपत्ति की मुख्य इकाई थी, इसलिए युद्ध तक को गायों की खोज कहा जाता था। उत्तर वैदिक काल में लोहे के औज़ारों से जंगल साफ़ हुए और खेती मुख्य हो गई, जिससे भूमि संपत्ति का केंद्र बन गई।
वर्ण व्यवस्था कब जन्म आधारित हुई?
उत्तर वैदिक काल में। पूर्व वैदिक समाज में वर्ण कर्म के आधार पर तय होता था और उसमें बदलाव संभव था। उत्तर वैदिक काल में स्थिर कृषि, बढ़ती संपत्ति और जटिल यज्ञ व्यवस्था के साथ वह क्रमशः जन्म आधारित होता चला गया और कठोर भी।
सभा और समिति क्या थीं?
ये पूर्व वैदिक काल की दो जन संस्थाएँ थीं, जो राजन यानी कबीले के मुखिया को सलाह देती थीं और उस पर अंकुश भी रखती थीं। इनसे पता चलता है कि उस समय शासन पूरी तरह एकतंत्रीय नहीं था। उत्तर वैदिक काल में राज्य के मज़बूत होने के साथ इनका महत्व घटता गया।
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