त्रिभुज: प्रकार, सर्वांगसमता एवं पाइथागोरस प्रमेय
Triangles, Congruence and the Pythagoras Theorem
त्रिभुज से 1 से 2 प्रश्न आते हैं और यह ज्यामिति का सबसे अधिक पूछा जाने वाला भाग है। वर्गीकरण, सर्वांगसमता की कसौटियाँ और पाइथागोरस प्रमेय — तीनों में नियम तय हैं, इसलिए यहाँ अनुमान की गुंजाइश नहीं रखनी चाहिए।
वर्गीकरण एवं मूल गुण
| आधार | प्रकार |
|---|---|
| भुजाओं से | समबाहु, समद्विबाहु, विषमबाहु |
| कोणों से | न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण |
- तीनों कोणों का योग 180° होता है।
- किसी भी दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से बड़ा होना चाहिए, वरना त्रिभुज बनेगा ही नहीं।
- बड़ी भुजा के सामने बड़ा कोण होता है।
- बाह्य कोण दोनों दूरस्थ अंतःकोणों के योग के बराबर होता है।
दूसरा नियम सीधे प्रश्न बनता है — तीन लंबाइयाँ देकर पूछा जाता है कि त्रिभुज बनेगा या नहीं। 3, 4 और 8 से त्रिभुज नहीं बनेगा, क्योंकि 3 + 4 = 7, जो 8 से कम है।
✗ 3, 4 और 8 सेंटीमीटर की भुजाओं से त्रिभुज बन जाएगा | ✓ 3 + 4 = 7 है, जो 8 से कम है, इसलिए त्रिभुज नहीं बनेगा
सर्वांगसमता की कसौटियाँ
| कसौटी | अर्थ |
|---|---|
| SSS | तीनों भुजाएँ बराबर |
| SAS | दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण |
| ASA | दो कोण और उनके बीच की भुजा |
| AAS | दो कोण और एक असंगत भुजा |
| RHS | समकोण, कर्ण और एक भुजा |
एक बात साफ़ रखिए — AAA सर्वांगसमता की कसौटी नहीं है, वह केवल समरूपता देती है। तीनों कोण बराबर होने पर आकृतियाँ एक जैसी दिखेंगी पर आकार अलग हो सकता है। यह जाल लगभग हर वर्ष रखा जाता है।
इसी तरह SSA भी कसौटी नहीं है, क्योंकि उससे दो अलग त्रिभुज बन सकते हैं। केवल समकोण त्रिभुज में वह RHS के रूप में काम करती है।
समरूपता
दो त्रिभुज समरूप तब होते हैं जब उनके संगत कोण बराबर हों और संगत भुजाएँ समानुपाती। सर्वांगसम त्रिभुज सदा समरूप होते हैं, पर समरूप त्रिभुज सर्वांगसम हों यह ज़रूरी नहीं।
समरूप त्रिभुजों में: क्षेत्रफलों का अनुपात = संगत भुजाओं के अनुपात का वर्ग
यह सूत्र सीधे पूछा जाता है — भुजाओं का अनुपात 2 : 3 हो तो क्षेत्रफलों का अनुपात 4 : 9 होगा, 2 : 3 नहीं।
पाइथागोरस प्रमेय
कर्ण² = आधार² + लंब²
यह केवल समकोण त्रिभुज में लागू होता है, और कर्ण सदा समकोण के सामने वाली सबसे बड़ी भुजा होती है। इसका विलोम भी सही है — यदि किसी त्रिभुज में सबसे बड़ी भुजा का वर्ग शेष दो के वर्गों के योग के बराबर हो, तो वह समकोण त्रिभुज है।
कुछ त्रिक याद रखिए — 3, 4, 5 | 5, 12, 13 | 8, 15, 17 | 7, 24, 25। इनके गुणज भी त्रिक होते हैं, जैसे 6, 8, 10।
पाइथागोरस लगाने से पहले जाँचिए कि त्रिभुज समकोण है या नहीं। यदि प्रश्न में समकोण नहीं कहा गया तो पहले विलोम से जाँचिए, सीधे सूत्र मत लगाइए।
TRE संकेत: AAA सर्वांगसमता की कसौटी नहीं — यह सबसे तयशुदा जाल है। दो भुजाओं का योग तीसरी से बड़ा वाला नियम भी सीधे प्रश्न बनता है। समरूप त्रिभुजों में क्षेत्रफल का अनुपात भुजाओं के अनुपात का वर्ग होता है — यहाँ सीधा अनुपात लिख देना आम गलती है।
60 सेकंड का रिवीजन
- त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है।
- किन्हीं दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से बड़ा होना चाहिए।
- बाह्य कोण दोनों दूरस्थ अंतःकोणों के योग के बराबर होता है।
- SSS, SAS, ASA, AAS और RHS सर्वांगसमता की कसौटियाँ हैं।
- AAA केवल समरूपता देती है, सर्वांगसमता नहीं।
- समरूप त्रिभुजों में क्षेत्रफलों का अनुपात भुजाओं के अनुपात का वर्ग होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या AAA सर्वांगसमता की कसौटी है?
नहीं। तीनों कोण बराबर होने से त्रिभुज केवल समरूप होते हैं, सर्वांगसम नहीं। उनका आकार अलग हो सकता है, जैसे एक छोटा और एक बड़ा त्रिभुज जिनके कोण समान हों। सर्वांगसमता के लिए कम से कम एक भुजा का बराबर होना आवश्यक है।
तीन लंबाइयों से त्रिभुज बनेगा या नहीं, कैसे जाँचें?
किन्हीं दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से बड़ा होना चाहिए, और यह तीनों जोड़ों के लिए सही होना चाहिए। तीन, चार और आठ से त्रिभुज नहीं बनेगा क्योंकि तीन जोड़ चार बराबर सात है, जो आठ से कम है।
समरूप त्रिभुजों के क्षेत्रफलों का अनुपात कैसे निकलता है?
वह संगत भुजाओं के अनुपात का वर्ग होता है। यदि भुजाओं का अनुपात दो और तीन है तो क्षेत्रफलों का अनुपात चार और नौ होगा। सीधे दो और तीन लिख देना सबसे आम गलती है और वही विकल्प जाल के रूप में रखा जाता है।
पाइथागोरस प्रमेय का विलोम क्या कहता है?
यदि किसी त्रिभुज में सबसे बड़ी भुजा का वर्ग शेष दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर हो, तो वह त्रिभुज समकोण होता है और समकोण उसी बड़ी भुजा के सामने बनता है। इससे यह जाँचा जा सकता है कि दिया गया त्रिभुज समकोण है या नहीं।
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