संघीय कार्यपालिका एवं संसद
संघीय कार्यपालिका एवं संसद
इस अध्याय से प्रश्न प्रायः तीन बिंदुओं पर आते हैं — राष्ट्रपति की योग्यता और निर्वाचन, दोनों सदनों का अंतर, और प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद की स्थिति। तीनों में संख्याएँ महत्वपूर्ण हैं, इसलिए उन्हें विशेष रूप से पक्का कीजिए।
राष्ट्रपति
राष्ट्रपति राज्य का प्रमुख है, पर वास्तविक शक्ति मंत्रिपरिषद के पास रहती है। उनका निर्वाचन निर्वाचक मंडल करता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों तथा विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
- आयु कम से कम पैंतीस वर्ष होनी चाहिए।
- कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है।
- उन्हें महाभियोग से हटाया जा सकता है।
- उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।
- राष्ट्रपति तीन प्रकार का आपातकाल घोषित कर सकते हैं।
राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह से काम करते हैं और चवालीसवें संशोधन के बाद वे सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं, पर दोबारा भेजी गई सलाह मानना अनिवार्य है।
संसद
| बिंदु | लोकसभा | राज्यसभा |
|---|---|---|
| कैसे बनी | प्रत्यक्ष निर्वाचन | अप्रत्यक्ष निर्वाचन |
| कार्यकाल | पाँच वर्ष | स्थायी सदन; एक तिहाई हर दो वर्ष |
| न्यूनतम आयु | पच्चीस वर्ष | तीस वर्ष |
| पीठासीन | अध्यक्ष | सभापति यानी उपराष्ट्रपति |
| धन विधेयक | केवल यहीं आ सकता है | केवल सिफ़ारिश दे सकती है |
धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत हो सकता है और राज्यसभा उसे अधिकतम चौदह दिन रोक सकती है, वह अस्वीकार नहीं कर सकती। यही लोकसभा की वित्तीय सर्वोच्चता का आधार है और सबसे अधिक पूछा जाने वाला बिंदु है।
संसद का सत्र वर्ष में कम से कम दो बार होना चाहिए और दो सत्रों के बीच छह माह से अधिक का अंतर नहीं हो सकता। शून्य काल और प्रश्न काल संसदीय कार्यवाही के महत्वपूर्ण अंग हैं।
✗ धन विधेयक राज्यसभा में भी प्रस्तुत किया जा सकता है | ✓ वह केवल लोकसभा में प्रस्तुत होता है; राज्यसभा उसे चौदह दिन से अधिक नहीं रोक सकती
प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद
प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख है और वास्तविक कार्यपालिका शक्ति उन्हीं के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद के पास है। उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं, पर व्यवहार में वे लोकसभा में बहुमत दल के नेता होते हैं।
मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, यानी यदि लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दे तो पूरी मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है। यह संसदीय व्यवस्था का मूल सिद्धांत है।
मंत्रिपरिषद का आकार इक्यानवेवें संशोधन से सीमित किया गया — वह लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के अंतर को एक वाक्य में रखिए — राष्ट्रपति राज्य का प्रमुख है और प्रधानमंत्री सरकार का। पहला औपचारिक शक्ति रखता है और दूसरा वास्तविक।
TRE संकेत: धन विधेयक केवल लोकसभा में सबसे अधिक पूछा जाने वाला बिंदु है। राज्यसभा स्थायी सदन है भी तयशुदा है। राष्ट्रपति की न्यूनतम आयु पैंतीस वर्ष और मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से उत्तरदायी भी सीधे आए हैं।
60 सेकंड का रिवीजन
- राष्ट्रपति राज्य का और प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख है।
- राष्ट्रपति का निर्वाचन निर्वाचक मंडल द्वारा होता है।
- राष्ट्रपति के लिए न्यूनतम आयु पैंतीस वर्ष है।
- राज्यसभा स्थायी सदन है और उसका एक तिहाई हर दो वर्ष में बदलता है।
- धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत हो सकता है।
- मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
धन विधेयक पर लोकसभा को अधिक शक्ति क्यों दी गई है?
क्योंकि लोकसभा जनता द्वारा सीधे चुनी जाती है और कर तथा व्यय का निर्णय जनता के प्रतिनिधियों के हाथ में होना चाहिए। राज्यसभा अप्रत्यक्ष रूप से चुनी जाती है, इसलिए वह धन विधेयक पर केवल सिफ़ारिश दे सकती है और उसे चौदह दिन से अधिक रोक नहीं सकती।
राज्यसभा को स्थायी सदन क्यों कहते हैं?
क्योंकि वह कभी पूरी तरह भंग नहीं होती। उसके सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है और हर दो वर्ष में एक तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होकर नए सदस्य आते हैं। इससे सदन में निरंतरता बनी रहती है, जबकि लोकसभा पाँच वर्ष बाद या उससे पहले भी भंग की जा सकती है।
सामूहिक उत्तरदायित्व का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि मंत्रिपरिषद एक इकाई की तरह लोकसभा के प्रति जवाबदेह है। किसी एक मंत्री के विरुद्ध पारित अविश्वास भी पूरी मंत्रिपरिषद पर लागू होता है और सबको त्यागपत्र देना पड़ता है। इसीलिए मंत्रिमंडल के भीतर मतभेद हो सकते हैं, पर बाहर सब एक ही निर्णय के साथ खड़े होते हैं।
राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह मानने को बाध्य हैं?
हाँ, पर उन्हें एक अवसर मिलता है। चवालीसवें संशोधन के बाद वे मंत्रिपरिषद की सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं। यदि मंत्रिपरिषद वही सलाह दोबारा भेज दे तो उसे मानना अनिवार्य है। इसी से यह संतुलन बनता है कि वे औपचारिक प्रमुख रहें पर पूरी तरह निष्क्रिय भी न हों।
