उपसर्ग, प्रत्यय एवं समास
उपसर्ग, प्रत्यय एवं समास
यह विषय व्याकरण का सबसे अंक-दायक भाग है और इससे 3 प्रश्न तक आते हैं। उपसर्ग-प्रत्यय में शब्द के आगे-पीछे जुड़े अंश पहचानने होते हैं, और समास में यह तय करना होता है कि दो पदों में कौन-सा पद प्रधान है।
उपसर्ग
शब्द के आरंभ में जुड़कर अर्थ बदलने वाला अंश उपसर्ग कहलाता है। संस्कृत के 22 उपसर्ग मानक माने जाते हैं।
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्र | आगे, अधिक | प्रबल, प्रगति |
| परा | उल्टा, पीछे | पराजय, पराक्रम |
| अनु | पीछे, समान | अनुसरण, अनुवाद |
| अभि | सामने, ओर | अभिमुख, अभियान |
| वि | विशेष, भिन्न | विदेश, विज्ञान |
| अधि | ऊपर, मुख्य | अध्यक्ष, अधिकार |
हिंदी के अपने उपसर्ग भी पूछे जाते हैं — अन (अनपढ़), कु (कुपुत्र), भर (भरपूर), अध (अधपका)। इनके उदाहरण संस्कृत वालों से अलग रखिए।
प्रत्यय
शब्द के अंत में जुड़ने वाला अंश प्रत्यय है। इसके दो भेद हैं — कृत् प्रत्यय जो क्रिया से जुड़ता है, और तद्धित प्रत्यय जो संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण से जुड़ता है।
- कृत् — लिख + आवट = लिखावट, पढ़ + आई = पढ़ाई, चल + अन = चलन।
- तद्धित — मानव + ता = मानवता, बच्चा + पन = बचपन, धन + ई = धनी।
✗ लिखावट में तद्धित प्रत्यय है | ✓ यह कृत् प्रत्यय है, क्योंकि आवट क्रिया लिखना से जुड़ा है
समास के छह भेद
| समास | प्रधान पद | उदाहरण |
|---|---|---|
| तत्पुरुष | उत्तर पद | राजपुत्र, देशभक्ति |
| कर्मधारय | उत्तर पद, विशेषण संबंध | नीलकमल, महात्मा |
| द्विगु | उत्तर पद, पहला पद संख्या | नवरात्र, त्रिभुज |
| द्वंद्व | दोनों पद | राम-लक्ष्मण, माता-पिता |
| बहुव्रीहि | कोई नहीं, अन्य पद | दशानन, चक्रधर |
| अव्ययीभाव | पूर्व पद | यथाशक्ति, प्रतिदिन |
भेद पहचानने का एक ही प्रश्न पूछिए — प्रधान कौन-सा पद है। दोनों प्रधान हों तो द्वंद्व, कोई प्रधान न हो और संकेत किसी तीसरे की ओर जाए तो बहुव्रीहि, पहला पद प्रधान हो तो अव्ययीभाव।
बहुव्रीहि ही सबसे अधिक गलत होता है। दशानन का अर्थ दस मुख नहीं, बल्कि रावण है; चक्रधर का अर्थ चक्र धारण करने वाला नहीं, बल्कि विष्णु है। संकेत बाहर जाता है, इसीलिए इसे बहुव्रीहि कहते हैं।
द्विगु और कर्मधारय में अंतर सरल है — यदि पहला पद संख्या हो तो द्विगु, और यदि पहला पद विशेषण हो तो कर्मधारय। नवरात्र द्विगु है, नीलकमल कर्मधारय।
TRE संकेत: समास में केवल एक प्रश्न पूछिए — प्रधान पद कौन-सा है। बहुव्रीहि की पहचान यह है कि अर्थ दोनों पदों से बाहर किसी तीसरे की ओर जाता है — दशानन यानी रावण, पीतांबर यानी कृष्ण। उपसर्ग में संस्कृत और हिंदी की सूची अलग-अलग रखिए, क्योंकि पत्र दोनों से पूछता है।
60 सेकंड का रिवीजन
- उपसर्ग शब्द के आरंभ में और प्रत्यय अंत में जुड़ता है।
- प्र, परा, अनु, अभि, वि, अधि प्रमुख संस्कृत उपसर्ग हैं।
- कृत् प्रत्यय क्रिया से और तद्धित संज्ञा या विशेषण से जुड़ता है।
- समास के छह भेद — तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व, बहुव्रीहि, अव्ययीभाव।
- पहला पद संख्या हो तो द्विगु, विशेषण हो तो कर्मधारय।
- बहुव्रीहि में अर्थ किसी तीसरे की ओर जाता है — दशानन यानी रावण।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बहुव्रीहि समास को कैसे पहचानें?
जब समस्त पद का अर्थ उसके दोनों पदों से बाहर किसी तीसरे की ओर संकेत करे। दशानन का अर्थ दस मुख नहीं बल्कि रावण है, और पीतांबर का अर्थ पीला वस्त्र नहीं बल्कि कृष्ण है। यही बाहरी संकेत इसकी सबसे पक्की पहचान है।
द्विगु और कर्मधारय में अंतर क्या है?
दोनों में उत्तर पद प्रधान होता है, पर द्विगु में पहला पद संख्यावाचक होता है, जैसे नवरात्र और त्रिभुज। कर्मधारय में पहला पद विशेषण होता है और दोनों पदों में विशेषण-विशेष्य का संबंध रहता है, जैसे नीलकमल और महात्मा।
कृत् और तद्धित प्रत्यय में क्या अंतर है?
कृत् प्रत्यय क्रिया या धातु के अंत में जुड़ता है और उससे बने शब्द कृदंत कहलाते हैं, जैसे लिखावट और पढ़ाई। तद्धित प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण के अंत में जुड़ता है, जैसे मानवता, बचपन और धनी।
अव्ययीभाव समास की पहचान क्या है?
इसमें पहला पद प्रधान होता है और पूरा समस्त पद अव्यय की तरह काम करता है, यानी उसका रूप नहीं बदलता। यथाशक्ति, प्रतिदिन, आजीवन और भरपेट इसके उदाहरण हैं। पहला पद प्रायः यथा, प्रति, आ या भर जैसा अव्यय होता है।
अगला कदम: व्याकरण में अंक तभी बनते हैं जब पहचान तुरंत हो — सोचकर नहीं, देखकर। इस अध्याय को ExamAtlas के BPSC TRE 4.0 मॉक टेस्ट में परखिए — पाँच विकल्प, −1/3 ऋणात्मक अंकन, हिंदी माध्यम।
