उपसर्ग, प्रत्यय, संधि एवं समास (आधार स्तर)
उपसर्ग, प्रत्यय, संधि एवं समास (आधार स्तर)
इस विषय से 2 प्रश्न आते हैं और अर्हता स्तर पर केवल पहचान पूछी जाती है — शब्द में उपसर्ग कौन-सा है, संधि विच्छेद क्या होगा, समास कौन-सा है। नियमों की गहराई में जाने की ज़रूरत नहीं, बुनियादी उदाहरण पर्याप्त हैं।
उपसर्ग एवं प्रत्यय
उपसर्ग शब्द के आरंभ में जुड़ता है और प्रत्यय अंत में। यही पूरा अंतर है और अर्हता स्तर पर इससे आगे नहीं पूछा जाता।
| उपसर्ग | उदाहरण | प्रत्यय | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| प्र | प्रगति, प्रबल | आवट | सजावट, लिखावट |
| वि | विदेश, विज्ञान | ता | मानवता, सुंदरता |
| अनु | अनुसरण, अनुवाद | पन | बचपन, लड़कपन |
| सु | सुगम, सुपुत्र | ई | धनी, गुणी |
| अध | अधपका, अधखिला | वाला | दूधवाला, गाड़ीवाला |
✗ सजावट में उपसर्ग जुड़ा है | ✓ आवट अंत में जुड़ा है, इसलिए यह प्रत्यय है
संधि (आधार स्तर)
दो वर्णों के मेल को संधि कहते हैं। अर्हता पत्र में प्रायः सरल स्वर संधि ही पूछी जाती है।
| संधि | विच्छेद | प्रकार |
|---|---|---|
| विद्यालय | विद्या + आलय | दीर्घ |
| देवालय | देव + आलय | दीर्घ |
| नरेंद्र | नर + इंद्र | गुण |
| महेश | महा + ईश | गुण |
| इत्यादि | इति + आदि | यण् |
| सदानंद | सत् + आनंद | व्यंजन |
पहचान का सरल सूत्र यही है — जुड़ने के बाद कौन-सा वर्ण बना। ए बना तो गुण, वही स्वर लंबा हुआ तो दीर्घ, य् या व् आया तो यण् संधि है।
समास (आधार स्तर)
| समास | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| तत्पुरुष | बाद वाला पद प्रधान | राजपुत्र, देशभक्ति |
| द्विगु | पहला पद संख्या | नवरात्र, त्रिभुज |
| द्वंद्व | दोनों पद प्रधान | माता-पिता, राम-लक्ष्मण |
| बहुव्रीहि | अर्थ किसी तीसरे का | दशानन यानी रावण |
अर्हता स्तर पर इन्हीं चार से प्रश्न बनता है। द्वंद्व सबसे आसान है, क्योंकि उसमें दोनों पदों के बीच और लगाया जा सकता है — माता और पिता। बहुव्रीहि में अर्थ दोनों पदों से बाहर चला जाता है।
तीनों विषयों के लिए एक ही आदत काम आती है — शब्द को तोड़कर देखिए। तोड़ने पर आगे का हिस्सा अलग हो तो उपसर्ग, पीछे का हो तो प्रत्यय, दो वर्ण मिले हों तो संधि, और दो पद मिले हों तो समास।
TRE संकेत: उपसर्ग आगे, प्रत्यय पीछे — यह एक पंक्ति आधे प्रश्न हल कर देती है। संधि में विद्यालय, नरेंद्र, इत्यादि तीन सबसे अधिक आने वाले उदाहरण हैं। समास में द्वंद्व और बहुव्रीहि की पहचान याद रखिए — बीच में और लगे तो द्वंद्व, अर्थ बाहर जाए तो बहुव्रीहि।
60 सेकंड का रिवीजन
- उपसर्ग शब्द के आरंभ में और प्रत्यय अंत में जुड़ता है।
- प्र, वि, अनु, सु प्रमुख उपसर्ग; आवट, ता, पन, ई प्रमुख प्रत्यय हैं।
- विद्यालय का विच्छेद विद्या और आलय, दीर्घ संधि है।
- नरेंद्र का विच्छेद नर और इंद्र, गुण संधि है।
- द्वंद्व समास में दोनों पदों के बीच और लगाया जा सकता है।
- बहुव्रीहि में अर्थ किसी तीसरे की ओर जाता है — दशानन यानी रावण।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उपसर्ग और प्रत्यय में क्या अंतर है?
उपसर्ग शब्द के आरंभ में जुड़कर अर्थ बदलता है, जैसे प्रगति में प्र और विदेश में वि। प्रत्यय शब्द के अंत में जुड़ता है, जैसे सजावट में आवट और मानवता में ता। स्थान देखकर ही भेद तय हो जाता है।
विद्यालय का संधि विच्छेद क्या है?
विद्या और आलय। यहाँ आ और आ मिलकर लंबा आ बना है, इसलिए यह दीर्घ संधि है। इसी तरह देवालय का विच्छेद देव और आलय होता है। ये दोनों उदाहरण अर्हता पत्र में सबसे अधिक पूछे जाते हैं।
द्वंद्व समास कैसे पहचानें?
यदि दोनों पद समान रूप से प्रधान हों और उनके बीच और लगाया जा सके, तो वह द्वंद्व समास है। माता-पिता का अर्थ है माता और पिता, तथा राम-लक्ष्मण का अर्थ राम और लक्ष्मण। यही सबसे सरल पहचान है।
बहुव्रीहि समास की पहचान क्या है?
जब समस्त पद का अर्थ उसके दोनों पदों से बाहर किसी तीसरे की ओर संकेत करे। दशानन का अर्थ दस मुख नहीं बल्कि रावण है। अर्थ का यह बाहर चला जाना ही इसकी सबसे पक्की पहचान है और परीक्षा में इसी से प्रश्न बनता है।
