Study Material

Pick a study material, then a subject, then start reading.

प्रागैतिहासिक संस्कृतियाँ

By ExamAtlas · 10/9/2026

प्रागैतिहासिक संस्कृतियाँ

भारतीय प्रागितिहास को पाषाण उपकरण तकनीक के आधार पर चार चरणों में बाँटा जाता है - पुरापाषाण (लगभग 20 लाख से 10000 ईसा पूर्व), मध्यपाषाण (लगभग 10000 से 6000 ईसा पूर्व), नवपाषाण (लगभग 7000 से 1000 ईसा पूर्व) और ताम्रपाषाण (लगभग 3000 से 900 ईसा पूर्व) | यह क्रम पूरे देश में एक साथ नहीं चला - हर क्षेत्र में तिथियाँ अलग हैं और चरण एक-दूसरे पर चढ़ते भी हैं |

पुरापाषाण काल

पुरापाषाण काल शिकार और संग्रहण का युग है - न कृषि, न मृद्भांड, न स्थायी बस्ती | उपकरण क्वार्टजाइट पत्थर पर बनते थे, इसलिए इस काल के मनुष्यों को क्वार्टजाइट मानव भी कहा जाता है | रॉबर्ट ब्रूस फुट ने 1863 में चेन्नई के पास पल्लवरम में पहला भारतीय पुरापाषाण उपकरण खोजा, जिससे भारतीय प्रागैतिहासिक पुरातत्व का आरंभ हुआ |

चरणउपकरणप्रमुख स्थल
निम्न पुरापाषाणहैंड-ऐक्स, क्लीवर, चॉपरसोहन घाटी, बेलन घाटी, भीमबेटका, अत्तिरम्पक्कम, हुंसगी
मध्य पुरापाषाणफलक उपकरण, खुरचनी, वेधनीनर्मदा घाटी, नेवासा, भीमबेटका
उच्च पुरापाषाणब्लेड, बुरिन, अस्थि उपकरणबेलन घाटी, कुरनूल गुफाएँ, रेनिगुंटा

इस काल का एकमात्र भारतीय मानव जीवाश्म नर्मदा मानव (Narmada hominid) है, जो 1982 में मध्य प्रदेश के हथनौरा से मिला | आंध्र प्रदेश की कुरनूल गुफाओं से उपमहाद्वीप के सबसे प्राचीन अस्थि उपकरण और अग्नि के प्रयोग के प्रमाण मिले हैं |

मध्यपाषाण काल

मध्यपाषाण संक्रमण का युग है, जिसकी पहचान सूक्ष्म पाषाण उपकरण (Microliths) हैं - पाँच सेंटीमीटर से छोटे ज्यामितीय उपकरण जो लकड़ी या हड्डी में जड़े जाते थे | इसका सबसे बड़ा सामाजिक परिवर्तन है पशुपालन का आरंभ, जिसमें सबसे पहले कुत्ता पालतू बना, तथा जान-बूझकर की गई मानव समाधि के सबसे पुराने प्रमाण |

Microlith = 5 सेंटीमीटर से छोटा, प्रायः ज्यामितीय, संयुक्त उपकरण में जड़ा हुआ

  • बागोर (राजस्थान) - सबसे बड़ा मध्यपाषाण स्थल; भारत में पशुपालन का प्राचीनतम प्रमाण
  • आदमगढ़ (मध्य प्रदेश) - बागोर के साथ पशुपालन का प्रमाण
  • भीमबेटका (मध्य प्रदेश) - शैलाश्रय, निरंतर निवास और सबसे समृद्ध शैलचित्र
  • सराय नाहर राय, महदहा, दमदमा (उत्तर प्रदेश) - मानव समाधियाँ, कुछ में समाधि सामग्री
  • लंघनाज (गुजरात) और बीरभानपुर (पश्चिम बंगाल) - क्षेत्रीय मध्यपाषाण समूह

भीमबेटका पर अलग ध्यान चाहिए क्योंकि यह UNESCO विश्व धरोहर स्थल है और शैलचित्र से जुड़े प्रश्नों का केंद्र है | यहाँ के चित्र उच्च पुरापाषाण से ऐतिहासिक काल तक फैले हैं | इनमें खनिज रंगों का प्रयोग है जिनमें लाल (हेमेटाइट) और सफेद प्रमुख हैं | विषय हैं शिकार, नृत्य, पशु और बाद के काल में घुड़सवार | हरा और पीला रंग कम मिलता है और मुख्यतः मध्यपाषाण स्तरों में |

नवपाषाण काल

नवपाषाण काल निर्णायक आर्थिक परिवर्तन लाता है - कृषि, स्थायी बस्ती, मृद्भांड और पॉलिशदार पाषाण उपकरण | यह हर जगह एक साथ नहीं शुरू हुआ, और यही क्षेत्रीय विस्तार UPSC में पूछा जाता है |

क्षेत्रस्थलविशेषता
उत्तर-पश्चिममेहरगढ़ (बलूचिस्तान)उपमहाद्वीप का प्राचीनतम कृषक ग्राम; गेहूँ, जौ, पशुपालन
कश्मीरबुर्जहोम, गुफकरालगर्त निवास (pit dwelling), स्वामी के साथ कुत्ते की समाधि, अस्थि उपकरण
पूर्वी भारतचिरांद (बिहार)समृद्ध अस्थि और सींग उपकरण उद्योग
दक्षिण भारतमस्की, ब्रह्मगिरि, हल्लूर, पिकलीहलगोबर जलाने से बने राख के टीले (ash mounds); पशु आधारित अर्थव्यवस्था
पूर्वोत्तरदाओजली हैडिंग (असम)कंधेदार सेल्ट, रस्सी छाप मृद्भांड, दक्षिण-पूर्व एशिया से संबंध

बुर्जहोम राख के टीलों के लिए प्रसिद्ध है  |   राख के टीले दक्षिण भारत की विशेषता हैं; बुर्जहोम गर्त निवास के लिए प्रसिद्ध है

ताम्रपाषाण संस्कृतियाँ

ताम्रपाषाण का अर्थ है ताँबा और पत्थर साथ-साथ - धातु का पहला प्रयोग, पर पाषाण उपकरण भी जारी | ये ग्रामीण कृषक संस्कृतियाँ थीं, अधिकांशतः हड़प्पा क्षेत्र से बाहर और कई बार उससे बाद की भी, इसलिए ताम्रपाषाण का अर्थ 'हड़प्पा-पूर्व' नहीं होता |

  • आहाड़-बनास (राजस्थान) - काले और लाल मृद्भांड, ताँबा गलाना, सूक्ष्म उपकरणों का अभाव
  • कायथा और मालवा (मध्य प्रदेश) - मालवा मृद्भांड ताम्रपाषाण काल के सर्वोत्तम माने जाते हैं
  • जोरवे (महाराष्ट्र) - इनामगाँव और दैमाबाद; दैमाबाद से प्रसिद्ध काँस्य रथ निधि मिली
  • चिरांद और सेनुवार (बिहार) - पूर्वी ताम्रपाषाण, चावल की खेती के साथ

इनामगाँव में बच्चों की बड़ी संख्या में समाधियाँ मिली हैं, जिससे उच्च शिशु मृत्यु दर का अनुमान लगाया जाता है | भोजन में अनाज प्रमुख था, पर ये समुदाय नगरीय नहीं थे, इनके पास लेखन नहीं था और अधिकांश मामलों में काँसा नहीं, शुद्ध ताँबा प्रयोग होता था |

संबंध: नवपाषाण क्रांति यह समझाती है कि हड़प्पा के नगर संभव कैसे हुए - नगरीकरण के लिए कृषि अधिशेष चाहिए | मेहरगढ़ सीधे प्रारंभिक हड़प्पा चरण में जाता है, और जोरवे तथा मालवा संस्कृतियाँ उत्तर हड़प्पा काल से मेल खाती हैं, जो 'निरंतरता बनाम पतन' की बहस में काम आता है | भीमबेटका कला और संस्कृति के प्रागैतिहासिक चित्रकला अध्याय से भी जुड़ता है |

परीक्षा संकेत: सामान्यतः एक प्रश्न आता है - या तो स्थल और विशेषता का मिलान, या किसी एक स्थल पर कथन आधारित प्रश्न | भीमबेटका, बुर्जहोम, मेहरगढ़ और इनामगाँव सबसे पसंदीदा हैं | आम जाल हैं - राख के टीलों को कश्मीर से जोड़ देना, मेहरगढ़ को हड़प्पा नगर मान लेना, और यह समझ लेना कि कृषि मध्यपाषाण काल में शुरू हुई | क्रम याद रखो - पुरापाषाण, मध्यपाषाण, नवपाषाण, ताम्रपाषाण - और हर चरण की देन भी |

FAQ

भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे प्राचीन कृषि स्थल कौन सा है?

वर्तमान बलूचिस्तान में स्थित मेहरगढ़, जिसकी तिथि लगभग 7000 ईसा पूर्व है | यहाँ गेहूँ और जौ की खेती, पालतू गाय-भेड़-बकरी, मिट्टी की ईंटों के घर और बाद में मृद्भांड मिले हैं | यही वह कृषि आधार है जिस पर आगे चलकर हड़प्पा सभ्यता खड़ी हुई |

UPSC के लिए भीमबेटका क्यों महत्वपूर्ण है?

भीमबेटका UNESCO विश्व धरोहर स्थल है जहाँ 700 से अधिक शैलाश्रय हैं और पुरापाषाण काल से निरंतर मानव निवास के प्रमाण मिलते हैं | लाल और सफेद खनिज रंगों वाले इसके चित्र भारत का सबसे बड़ा प्रागैतिहासिक कला संग्रह हैं और इतिहास तथा संस्कृति दोनों में पूछे जाते हैं |

नवपाषाण और ताम्रपाषाण में क्या अंतर है?

नवपाषाण समुदाय पॉलिशदार पाषाण उपकरणों से खेती करते थे और उनके पास धातु नहीं थी | ताम्रपाषाण समुदाय पाषाण के साथ ताँबे का भी प्रयोग करते थे | ताम्रपाषाण हर क्षेत्र में नवपाषाण के बाद ही आया हो, यह ज़रूरी नहीं - कई ताम्रपाषाण संस्कृतियाँ हड़प्पा के समकालीन या बाद की हैं |

60 सेकंड में दोहराव

  • ब्रूस फुट, पल्लवरम, 1863 - भारतीय प्रागैतिहासिक पुरातत्व का आरंभ |
  • हथनौरा का नर्मदा मानव भारतीय पुरापाषाण का एकमात्र मानव जीवाश्म है |
  • मध्यपाषाण = सूक्ष्म उपकरण + पशुपालन (बागोर, आदमगढ़) + समाधि (सराय नाहर राय) |
  • नवपाषाण = कृषि, मृद्भांड, पॉलिश उपकरण; मेहरगढ़ प्राचीनतम, बुर्जहोम गर्त निवास, दक्षिण में राख के टीले |
  • ताम्रपाषाण = ताँबा और पत्थर; आहाड़, मालवा, जोरवे; दैमाबाद काँस्य निधि |
  • क्रम याद रखो - उपकरण, सूक्ष्म उपकरण, कृषि, धातु |