प्रागैतिहासिक संस्कृतियाँ
प्रागैतिहासिक संस्कृतियाँ
भारतीय प्रागितिहास को पाषाण उपकरण तकनीक के आधार पर चार चरणों में बाँटा जाता है - पुरापाषाण (लगभग 20 लाख से 10000 ईसा पूर्व), मध्यपाषाण (लगभग 10000 से 6000 ईसा पूर्व), नवपाषाण (लगभग 7000 से 1000 ईसा पूर्व) और ताम्रपाषाण (लगभग 3000 से 900 ईसा पूर्व) | यह क्रम पूरे देश में एक साथ नहीं चला - हर क्षेत्र में तिथियाँ अलग हैं और चरण एक-दूसरे पर चढ़ते भी हैं |
पुरापाषाण काल
पुरापाषाण काल शिकार और संग्रहण का युग है - न कृषि, न मृद्भांड, न स्थायी बस्ती | उपकरण क्वार्टजाइट पत्थर पर बनते थे, इसलिए इस काल के मनुष्यों को क्वार्टजाइट मानव भी कहा जाता है | रॉबर्ट ब्रूस फुट ने 1863 में चेन्नई के पास पल्लवरम में पहला भारतीय पुरापाषाण उपकरण खोजा, जिससे भारतीय प्रागैतिहासिक पुरातत्व का आरंभ हुआ |
| चरण | उपकरण | प्रमुख स्थल |
|---|---|---|
| निम्न पुरापाषाण | हैंड-ऐक्स, क्लीवर, चॉपर | सोहन घाटी, बेलन घाटी, भीमबेटका, अत्तिरम्पक्कम, हुंसगी |
| मध्य पुरापाषाण | फलक उपकरण, खुरचनी, वेधनी | नर्मदा घाटी, नेवासा, भीमबेटका |
| उच्च पुरापाषाण | ब्लेड, बुरिन, अस्थि उपकरण | बेलन घाटी, कुरनूल गुफाएँ, रेनिगुंटा |
इस काल का एकमात्र भारतीय मानव जीवाश्म नर्मदा मानव (Narmada hominid) है, जो 1982 में मध्य प्रदेश के हथनौरा से मिला | आंध्र प्रदेश की कुरनूल गुफाओं से उपमहाद्वीप के सबसे प्राचीन अस्थि उपकरण और अग्नि के प्रयोग के प्रमाण मिले हैं |
मध्यपाषाण काल
मध्यपाषाण संक्रमण का युग है, जिसकी पहचान सूक्ष्म पाषाण उपकरण (Microliths) हैं - पाँच सेंटीमीटर से छोटे ज्यामितीय उपकरण जो लकड़ी या हड्डी में जड़े जाते थे | इसका सबसे बड़ा सामाजिक परिवर्तन है पशुपालन का आरंभ, जिसमें सबसे पहले कुत्ता पालतू बना, तथा जान-बूझकर की गई मानव समाधि के सबसे पुराने प्रमाण |
Microlith = 5 सेंटीमीटर से छोटा, प्रायः ज्यामितीय, संयुक्त उपकरण में जड़ा हुआ
- बागोर (राजस्थान) - सबसे बड़ा मध्यपाषाण स्थल; भारत में पशुपालन का प्राचीनतम प्रमाण
- आदमगढ़ (मध्य प्रदेश) - बागोर के साथ पशुपालन का प्रमाण
- भीमबेटका (मध्य प्रदेश) - शैलाश्रय, निरंतर निवास और सबसे समृद्ध शैलचित्र
- सराय नाहर राय, महदहा, दमदमा (उत्तर प्रदेश) - मानव समाधियाँ, कुछ में समाधि सामग्री
- लंघनाज (गुजरात) और बीरभानपुर (पश्चिम बंगाल) - क्षेत्रीय मध्यपाषाण समूह
भीमबेटका पर अलग ध्यान चाहिए क्योंकि यह UNESCO विश्व धरोहर स्थल है और शैलचित्र से जुड़े प्रश्नों का केंद्र है | यहाँ के चित्र उच्च पुरापाषाण से ऐतिहासिक काल तक फैले हैं | इनमें खनिज रंगों का प्रयोग है जिनमें लाल (हेमेटाइट) और सफेद प्रमुख हैं | विषय हैं शिकार, नृत्य, पशु और बाद के काल में घुड़सवार | हरा और पीला रंग कम मिलता है और मुख्यतः मध्यपाषाण स्तरों में |
नवपाषाण काल
नवपाषाण काल निर्णायक आर्थिक परिवर्तन लाता है - कृषि, स्थायी बस्ती, मृद्भांड और पॉलिशदार पाषाण उपकरण | यह हर जगह एक साथ नहीं शुरू हुआ, और यही क्षेत्रीय विस्तार UPSC में पूछा जाता है |
| क्षेत्र | स्थल | विशेषता |
|---|---|---|
| उत्तर-पश्चिम | मेहरगढ़ (बलूचिस्तान) | उपमहाद्वीप का प्राचीनतम कृषक ग्राम; गेहूँ, जौ, पशुपालन |
| कश्मीर | बुर्जहोम, गुफकराल | गर्त निवास (pit dwelling), स्वामी के साथ कुत्ते की समाधि, अस्थि उपकरण |
| पूर्वी भारत | चिरांद (बिहार) | समृद्ध अस्थि और सींग उपकरण उद्योग |
| दक्षिण भारत | मस्की, ब्रह्मगिरि, हल्लूर, पिकलीहल | गोबर जलाने से बने राख के टीले (ash mounds); पशु आधारित अर्थव्यवस्था |
| पूर्वोत्तर | दाओजली हैडिंग (असम) | कंधेदार सेल्ट, रस्सी छाप मृद्भांड, दक्षिण-पूर्व एशिया से संबंध |
✗ बुर्जहोम राख के टीलों के लिए प्रसिद्ध है | ✓ राख के टीले दक्षिण भारत की विशेषता हैं; बुर्जहोम गर्त निवास के लिए प्रसिद्ध है
ताम्रपाषाण संस्कृतियाँ
ताम्रपाषाण का अर्थ है ताँबा और पत्थर साथ-साथ - धातु का पहला प्रयोग, पर पाषाण उपकरण भी जारी | ये ग्रामीण कृषक संस्कृतियाँ थीं, अधिकांशतः हड़प्पा क्षेत्र से बाहर और कई बार उससे बाद की भी, इसलिए ताम्रपाषाण का अर्थ 'हड़प्पा-पूर्व' नहीं होता |
- आहाड़-बनास (राजस्थान) - काले और लाल मृद्भांड, ताँबा गलाना, सूक्ष्म उपकरणों का अभाव
- कायथा और मालवा (मध्य प्रदेश) - मालवा मृद्भांड ताम्रपाषाण काल के सर्वोत्तम माने जाते हैं
- जोरवे (महाराष्ट्र) - इनामगाँव और दैमाबाद; दैमाबाद से प्रसिद्ध काँस्य रथ निधि मिली
- चिरांद और सेनुवार (बिहार) - पूर्वी ताम्रपाषाण, चावल की खेती के साथ
इनामगाँव में बच्चों की बड़ी संख्या में समाधियाँ मिली हैं, जिससे उच्च शिशु मृत्यु दर का अनुमान लगाया जाता है | भोजन में अनाज प्रमुख था, पर ये समुदाय नगरीय नहीं थे, इनके पास लेखन नहीं था और अधिकांश मामलों में काँसा नहीं, शुद्ध ताँबा प्रयोग होता था |
संबंध: नवपाषाण क्रांति यह समझाती है कि हड़प्पा के नगर संभव कैसे हुए - नगरीकरण के लिए कृषि अधिशेष चाहिए | मेहरगढ़ सीधे प्रारंभिक हड़प्पा चरण में जाता है, और जोरवे तथा मालवा संस्कृतियाँ उत्तर हड़प्पा काल से मेल खाती हैं, जो 'निरंतरता बनाम पतन' की बहस में काम आता है | भीमबेटका कला और संस्कृति के प्रागैतिहासिक चित्रकला अध्याय से भी जुड़ता है |
परीक्षा संकेत: सामान्यतः एक प्रश्न आता है - या तो स्थल और विशेषता का मिलान, या किसी एक स्थल पर कथन आधारित प्रश्न | भीमबेटका, बुर्जहोम, मेहरगढ़ और इनामगाँव सबसे पसंदीदा हैं | आम जाल हैं - राख के टीलों को कश्मीर से जोड़ देना, मेहरगढ़ को हड़प्पा नगर मान लेना, और यह समझ लेना कि कृषि मध्यपाषाण काल में शुरू हुई | क्रम याद रखो - पुरापाषाण, मध्यपाषाण, नवपाषाण, ताम्रपाषाण - और हर चरण की देन भी |
FAQ
भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे प्राचीन कृषि स्थल कौन सा है?
वर्तमान बलूचिस्तान में स्थित मेहरगढ़, जिसकी तिथि लगभग 7000 ईसा पूर्व है | यहाँ गेहूँ और जौ की खेती, पालतू गाय-भेड़-बकरी, मिट्टी की ईंटों के घर और बाद में मृद्भांड मिले हैं | यही वह कृषि आधार है जिस पर आगे चलकर हड़प्पा सभ्यता खड़ी हुई |
UPSC के लिए भीमबेटका क्यों महत्वपूर्ण है?
भीमबेटका UNESCO विश्व धरोहर स्थल है जहाँ 700 से अधिक शैलाश्रय हैं और पुरापाषाण काल से निरंतर मानव निवास के प्रमाण मिलते हैं | लाल और सफेद खनिज रंगों वाले इसके चित्र भारत का सबसे बड़ा प्रागैतिहासिक कला संग्रह हैं और इतिहास तथा संस्कृति दोनों में पूछे जाते हैं |
नवपाषाण और ताम्रपाषाण में क्या अंतर है?
नवपाषाण समुदाय पॉलिशदार पाषाण उपकरणों से खेती करते थे और उनके पास धातु नहीं थी | ताम्रपाषाण समुदाय पाषाण के साथ ताँबे का भी प्रयोग करते थे | ताम्रपाषाण हर क्षेत्र में नवपाषाण के बाद ही आया हो, यह ज़रूरी नहीं - कई ताम्रपाषाण संस्कृतियाँ हड़प्पा के समकालीन या बाद की हैं |
60 सेकंड में दोहराव
- ब्रूस फुट, पल्लवरम, 1863 - भारतीय प्रागैतिहासिक पुरातत्व का आरंभ |
- हथनौरा का नर्मदा मानव भारतीय पुरापाषाण का एकमात्र मानव जीवाश्म है |
- मध्यपाषाण = सूक्ष्म उपकरण + पशुपालन (बागोर, आदमगढ़) + समाधि (सराय नाहर राय) |
- नवपाषाण = कृषि, मृद्भांड, पॉलिश उपकरण; मेहरगढ़ प्राचीनतम, बुर्जहोम गर्त निवास, दक्षिण में राख के टीले |
- ताम्रपाषाण = ताँबा और पत्थर; आहाड़, मालवा, जोरवे; दैमाबाद काँस्य निधि |
- क्रम याद रखो - उपकरण, सूक्ष्म उपकरण, कृषि, धातु |
