वैदिक काल
वैदिक काल
वैदिक काल (लगभग 1500 से 600 ईसा पूर्व) का पुनर्निर्माण लगभग पूरी तरह साहित्य से होता है, पुरातत्व से नहीं | इसके दो भाग हैं - पूर्व या ऋग्वैदिक काल (लगभग 1500-1000 ईसा पूर्व) जो सप्त सिंधु क्षेत्र में था, और उत्तर वैदिक काल (लगभग 1000-600 ईसा पूर्व) जो गंगा-यमुना दोआब में फैला | इस बदलाव के साथ अर्थव्यवस्था, राजनीति और धर्म तीनों बदल जाते हैं |
चार वेद और वैदिक साहित्य
| ग्रंथ | स्वरूप | याद रखने योग्य बात |
|---|---|---|
| ऋग्वेद | 10 मंडलों में 1028 सूक्त | सबसे प्राचीन; मंडल दो से सात वंश मंडल और सबसे पुराने; गायत्री मंत्र तीसरे मंडल में |
| सामवेद | गान में ढले मंत्र | भारतीय शास्त्रीय संगीत का मूल; मौलिक सामग्री सबसे कम |
| यजुर्वेद | यज्ञ सूत्र, गद्य और पद्य दोनों | एकमात्र वेद जिसमें गद्य है; शुक्ल और कृष्ण दो शाखाएँ |
| अथर्ववेद | जादू-टोना, मंत्र, औषधि | सबसे बाद का; लोक विश्वासों का प्रतिबिंब; ब्रह्मवेद भी कहलाता है |
हर वेद की चार परतें हैं - संहिता (मंत्र संग्रह), ब्राह्मण (यज्ञ की व्याख्या), आरण्यक (वन ग्रंथ) और उपनिषद (दर्शन) | वेदांग - शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद और ज्योतिष - वेद के अंग हैं, स्वयं वेद नहीं |
संहिता → ब्राह्मण → आरण्यक → उपनिषद (कर्मकांड से दर्शन तक)
ऋग्वैदिक समाज और राजनीति
ऋग्वैदिक समाज पशुपालक और कबीलाई था | संपत्ति का माप गाय थी - गविष्टि का शाब्दिक अर्थ है 'गायों की खोज' पर प्रयोग युद्ध के लिए होता था, और गोपति का अर्थ गायों का स्वामी तथा मुखिया दोनों है | कबीला जन कहलाता था और उसका मुखिया राजन्, जो भूमि का राजा नहीं बल्कि लोगों का नेता था | सभाएँ - सभा (वरिष्ठ जन), समिति (पूरे कबीले की सभा) और विदथ (सबसे प्राचीन, आर्थिक और धार्मिक कार्य) - मुखिया पर अंकुश रखती थीं | स्त्रियाँ सभा और विदथ में भाग ले सकती थीं |
- परुष्णी (रावी) नदी पर दाशराज्ञ युद्ध - भरत मुखिया सुदास ने दस राजाओं के संघ को हराया
- पुरोहित, सेनानी और ग्रामणी मुख्य पदाधिकारी; न स्थायी सेना, न नियमित कर
- बलि स्वैच्छिक भेंट थी, अनिवार्य कर नहीं
- ऋग्वेद में वर्ण का मूल अर्थ रंग है; चार वर्णों का पहला उल्लेख दसवें मंडल के पुरुष सूक्त में है जो बाद का जोड़ है
- इंद्र, अग्नि और वरुण प्रमुख देवता; सर्वाधिक सूक्त इंद्र के, दूसरे स्थान पर अग्नि
उत्तर वैदिक परिवर्तन
दोआब की ओर पूर्वी विस्तार, जिसमें लोहे (श्याम अयस या कृष्ण अयस) ने सहायता की, पशुपालकों को स्थायी कृषक बना देता है | राजनीतिक इकाइयाँ भूमि आधारित हो जाती हैं, राजन् अब सम्राट, एकराट या अधिराज कहलाता है, और विशाल यज्ञ उसे वैधता देते हैं | कर नियमित हो जाता है और सभाएँ कमज़ोर पड़ती हैं - विदथ पूरी तरह लुप्त हो जाता है और स्त्रियाँ सभा से बाहर कर दी जाती हैं |
| पक्ष | ऋग्वैदिक | उत्तर वैदिक |
|---|---|---|
| अर्थव्यवस्था | पशुपालन, गोधन, सीमित कृषि | स्थायी कृषि, चावल (व्रीहि), लौह उपकरण |
| राजनीति | कबीलाई जन, सभाओं का अंकुश | भूमि आधारित जनपद, यज्ञ और कर वाला राजा |
| समाज | वर्ण लचीला, कठोर जाति नहीं | चार वर्ण कठोर, गोत्र और आश्रम व्यवस्था |
| धर्म | इंद्र, अग्नि, वरुण; सरल यज्ञ | प्रजापति सर्वोच्च; विष्णु और रुद्र का उदय; विशाल यज्ञ |
| स्त्री | सभा और विदथ में भाग; गार्गी, मैत्रेयी | सभाओं से बाहर, स्थिति में गिरावट |
बड़े राजकीय यज्ञ बार-बार पूछे जाते हैं | राजसूय राज्याभिषेक का यज्ञ है, अश्वमेध उस भूभाग पर निर्विवाद प्रभुत्व का दावा है जहाँ घोड़ा एक वर्ष घूमता है, और वाजपेय रथ दौड़ का अनुष्ठान है जो राजा को सम्राट बनाता है | काल के अंत में उपनिषद इसी कर्मकांड के विरुद्ध खड़े होते हैं और आत्मा, ब्रह्म तथा कर्म की ओर मुड़ते हैं |
✗ चार आश्रमों का वर्णन ऋग्वेद में है | ✓ चार आश्रम व्यवस्था उत्तर वैदिक और उसके बाद का विकास है
संबंध: उत्तर वैदिक जनपद सीधे अगले विषय के सोलह महाजनपदों में बदलते हैं, और यज्ञ के विरुद्ध उपनिषदीय प्रतिक्रिया बौद्ध तथा जैन धर्म की भूमि तैयार करती है | लोहे पर आधारित कृषि विस्तार गंगा मैदान के भूगोल और प्रारंभिक नगरीकरण के आर्थिक प्रश्नों से जुड़ता है |
परीक्षा संकेत: प्रायः हर वर्ष एक प्रश्न, और अब राजनीतिक इतिहास से अधिक वैदिक साहित्य पर - कौन सी बात किस ग्रंथ में है और कौन सा विचार किस परत का है | वेद और विषय का सुमेलन सबसे सामान्य प्रारूप है | जाल - पुरुष सूक्त को प्रारंभिक मान लेना, वेदांग को वेद समझ लेना, सभा और समिति में भ्रम, तथा आश्रम व्यवस्था को ऋग्वेद से जोड़ देना | यह भी याद रखो कि उपनिषदों को वेदांत कहा जाता है और 'सत्यमेव जयते' मुण्डक उपनिषद से लिया गया है |
FAQ
सभा और समिति में क्या अंतर है?
सभा वरिष्ठ और प्रतिष्ठित लोगों की छोटी सभा थी जो न्यायिक कार्य भी देखती थी | समिति पूरे कबीले की व्यापक सभा थी जो नीति पर विचार करती थी और राजन् के चयन से जुड़ी थी | उत्तर वैदिक काल में राजतंत्र मज़बूत होने पर दोनों का महत्व घट गया |
सबसे प्राचीन और सबसे बाद का वेद कौन सा है?
ऋग्वेद सबसे प्राचीन है जिसमें दस मंडलों में 1028 सूक्त हैं, और अथर्ववेद सबसे बाद का है | अथर्ववेद में मंत्र, जादू-टोना और लोक औषधि हैं तथा यह उन लोकप्रिय विश्वासों को दर्शाता है जो पुरानी पुरोहित परंपरा से बाहर थे, इसीलिए इसे सबसे अंत में मान्यता मिली |
उत्तर वैदिक काल में स्त्रियों की स्थिति क्यों गिरी?
स्थायी कृषि और भूमि आधारित राजतंत्र ने महत्व भूमि, उत्तराधिकार और पुरोहितों द्वारा संचालित विशाल सार्वजनिक यज्ञों की ओर मोड़ दिया | स्त्रियाँ सभा से हटा दी गईं, विदथ लुप्त हो गया, और ग्रंथों ने प्रतिष्ठा को यज्ञ तथा संतान से जोड़ दिया, जिससे ऋग्वैदिक स्त्रियों को मिली जगह सिकुड़ गई |
60 सेकंड में दोहराव
- पूर्व वैदिक सप्त सिंधु में, उत्तर वैदिक गंगा-यमुना दोआब में |
- चार परतें - संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद; कर्मकांड से दर्शन तक |
- ऋग्वैदिक राजनीति कबीलाई - जन, राजन्, सभा, समिति, विदथ; बलि स्वैच्छिक |
- लोहा और चावल पशुपालकों को कृषक बनाते हैं; जनपद और नियमित कर आते हैं |
- राजसूय, अश्वमेध और वाजपेय उत्तर वैदिक राजा को वैधता देते हैं |
- पुरुष सूक्त (दसवाँ मंडल) चार वर्णों का पहला उल्लेख है और बाद का जोड़ है |
