विजयनगर साम्राज्य
विजयनगर साम्राज्य
विजयनगर साम्राज्य (1336-1646) की स्थापना हरिहर और बुक्का ने तुंगभद्रा तट पर की और यह दो शताब्दियों तक प्रायद्वीपीय भारत की प्रमुख शक्ति बना रहा | यह नायंकार और अयगार व्यवस्था, सुदृढ़ राजस्व आधार, व्यापक विदेशी व्यापार और हम्पी की भव्य राजधानी के लिए जाना जाता है, जो अब UNESCO विश्व धरोहर स्थल है |
चार वंश
| वंश | काल | प्रमुख शासक और उपलब्धि |
|---|---|---|
| संगम | 1336-1485 | हरिहर प्रथम और बुक्का प्रथम द्वारा स्थापित; देवराय द्वितीय सबसे शक्तिशाली, जिन्होंने मुस्लिम घुड़सवार और धनुर्धर भर्ती किए |
| सालुव | 1485-1505 | कमज़ोरी के काल में सालुव नरसिंह ने सत्ता हथियाई |
| तुलुव | 1505-1570 | कृष्णदेवराय सबसे महान; अच्युतदेवराय; सदाशिवराय के समय 1565 में तालिकोटा में पराजय |
| अरविडु | 1570-1646 | हम्पी की लूट के बाद पेनुकोंडा और चंद्रगिरि से शासन |
कृष्णदेवराय (1509-1529) ने ओडिशा के गजपतियों और बहमनी उत्तराधिकारी राज्यों को हराया, पुर्तगालियों से मैत्रीपूर्ण संबंध रखे, और तेलुगु में राजनीति की कृति अमुक्तमाल्यद लिखी | उनके दरबार में अष्टदिग्गज थे, आठ महान तेलुगु कवि, जिनमें अल्लसानि पेद्दन आंध्रकवितापितामह कहलाए |
प्रशासन
साम्राज्य मंडलम या राज्य नामक प्रांतों में बँटा था, जिन पर प्रायः राजपरिवार का व्यक्ति शासक होता था, फिर नाडु और गाँव | विजयनगर प्रशासन की पहचान दो संस्थाएँ हैं |
| व्यवस्था | अर्थ |
|---|---|
| नायंकार | किसी सैन्य प्रमुख या नायक को दिया गया क्षेत्र, जो सेना रखता और निश्चित राशि देता था; बाद में नायक स्वतंत्र हो गए, जैसे मदुरै, तंजौर और जिंजी में |
| अयगार | बारह वंशानुगत ग्राम पदाधिकारियों का समूह, जिन्हें करमुक्त भूमि मिलती थी और जो राजस्व, अभिलेख, पहरा और सेवाएँ देखते थे |
| अमर-नायक | आवंटन का वह विशिष्ट रूप जिसमें नायक निश्चित संख्या में सैनिक रखने के लिए अमरम् भूमि रखता था |
- भू-राजस्व मुख्य आय थी, जो मिट्टी और फसल के अनुसार छठे से तिहाई भाग तक होती थी
- अनेक अतिरिक्त कर थे, विवाह कर सहित; कृष्णदेवराय ने कुछ घटाए
- राज्य बड़ी स्थायी सेना रखता था, जिसके घोड़े पुर्तगाली नियंत्रित बंदरगाहों से आते थे
- अरब और पुर्तगाल से घोड़ों का व्यापार सामरिक आवश्यकता था, क्योंकि दक्षिण भारत में युद्ध के घोड़े नहीं पलते थे
- निकोलो कोंटी, अब्दुर रज़्ज़ाक, डोमिंगो पेस और फर्नाओ नुनिज़ के वृत्तांत हम्पी की समृद्धि बताते हैं
समाज, संस्कृति और हम्पी
विजयनगर ने तेलुगु, कन्नड़, तमिल और संस्कृत चारों को संरक्षण दिया | स्थापत्य में एक विशिष्ट विजयनगर या प्रोविड शैली विकसित हुई, जिसमें ऊँचे गोपुरम, अलंकृत स्तंभ मंडप, देवी के लिए अम्मन मंदिर और कल्याण मंडप होते हैं | हम्पी का विट्ठल मंदिर अपने पाषाण रथ और संगीत स्तंभों के साथ तथा हज़ार राम मंदिर इसके मानक उदाहरण हैं | पूरा हम्पी UNESCO विश्व धरोहर सूची में है |
✗ विजयनगर स्थापत्य नागर शैली की शाखा है | ✓ यह द्रविड़ परंपरा का परवर्ती विकास है, जिसमें गोपुरम और स्तंभ मंडप हैं, शिखर आधारित नागर नहीं
पतन
तात्कालिक कारण था 1565 का तालिकोटा या राक्षसी-तंगड़ी युद्ध, जिसमें बीजापुर, अहमदनगर, गोलकुंडा और बीदर के संघ ने राम राय के नेतृत्व वाली विजयनगर सेना को हराया; राम राय बंदी बनाकर मार दिए गए | हम्पी कई महीनों तक लूटा गया | दीर्घकालिक कारणों में नायकों की बढ़ती स्वतंत्रता, रायचूर दोआब पर निरंतर युद्ध, और आयातित घोड़ों पर निर्भरता शामिल हैं |
संबंध: विजयनगर की नायंकार व्यवस्था सल्तनत के इक्ता और मुगल जागीर से तुलना के लिए उपयोगी है, इसलिए तीनों साथ दोहराओ | हम्पी कला-संस्कृति और समसामयिकी की UNESCO सूचियों से जुड़ता है, और पुर्तगाली घोड़ा व्यापार आधुनिक भारत के यूरोपीय आगमन विषय से |
परीक्षा संकेत: सामान्यतः एक प्रश्न, प्रायः प्रशासन, विदेशी यात्रियों या हम्पी स्थापत्य पर | नायंकार, अमर-नायक और अयगार ठीक-ठीक याद रखो, और हर यात्री को उस शासक से जोड़ो जिसके समय वह आया | जाल - तालिकोटा को 1556 में मान लेना, अमुक्तमाल्यद को संस्कृत की रचना कहना, और विजयनगर मंदिरों को नागर कहना | एक जुड़ा प्रश्न यह भी आता है कि संगीत स्तंभों के लिए कौन सा स्थल प्रसिद्ध है - उत्तर है हम्पी का विट्ठल मंदिर |
FAQ
विजयनगर साम्राज्य की स्थापना किसने और कब की?
हरिहर प्रथम और बुक्का प्रथम ने 1336 में तुंगभद्रा के दक्षिणी तट पर, संत विद्यारण्य के मार्गदर्शन में इसकी स्थापना की | उनका शुरू किया संगम वंश चार शासक घरानों में पहला था, जिसके बाद सालुव, तुलुव और अरविडु वंश आए |
अयगार व्यवस्था क्या थी?
यह ग्राम प्रशासन की वह व्यवस्था थी जिसमें बारह वंशानुगत पदाधिकारी - लेखाकार, मुखिया और पहरेदार सहित - गाँव का काम चलाते थे और उन्हें वेतन नहीं, करमुक्त भूमि मिलती थी | इससे ग्राम प्रशासन केंद्र के उलटफेर से स्वतंत्र रूप से स्थिर बना रहता था |
विजयनगर आयातित घोड़ों पर निर्भर क्यों था?
दक्षिण भारत की जलवायु और भूभाग अच्छे युद्ध घोड़ों के प्रजनन के लिए उपयुक्त नहीं थे, इसलिए घुड़सवार सेना के घोड़े पश्चिमी तट के बंदरगाहों से अरब और फारस से मँगाने पड़ते थे | इसीलिए बंदरगाहों पर नियंत्रण और अरब तथा बाद में पुर्तगाली व्यापारियों से अच्छे संबंध सामरिक आवश्यकता थे |
60 सेकंड में दोहराव
- 1336 में हरिहर और बुक्का ने स्थापना की; चार वंश - संगम, सालुव, तुलुव, अरविडु |
- कृष्णदेवराय ने तेलुगु में अमुक्तमाल्यद लिखी और अष्टदिग्गजों को संरक्षण दिया |
- नायंकार सैन्य प्रमुखों को क्षेत्र देता है; अयगार बारह सदस्यों का ग्राम निकाय है |
- विदेशी वृत्तांत - निकोलो कोंटी, अब्दुर रज़्ज़ाक, डोमिंगो पेस, फर्नाओ नुनिज़ |
- विजयनगर शैली - ऊँचे गोपुरम, कल्याण मंडप, अम्मन मंदिर; हम्पी का विट्ठल मंदिर |
- 1565 में तालिकोटा में दक्कन सल्तनतों के संघ से पराजय; हम्पी लूटा गया |
