वर्तनी शुद्धि एवं वाक्य शुद्धि
वर्तनी शुद्धि एवं वाक्य शुद्धि
शुद्धि से 2 प्रश्न आते हैं और शिक्षक भर्ती के अर्हता पत्र में इसका महत्व संख्या से अधिक है, क्योंकि शुद्ध लेखन कक्षा में सीधे काम आता है। प्रश्न सरल रहते हैं — दिए गए विकल्पों में शुद्ध रूप पहचानना होता है।
अशुद्ध बनाम शुद्ध वर्तनी
| अशुद्ध | शुद्ध | अशुद्ध | शुद्ध |
|---|---|---|---|
| आर्शीवाद | आशीर्वाद | उज्जवल | उज्ज्वल |
| परिक्षा | परीक्षा | ब्राम्हण | ब्राह्मण |
| सम्मान्य | सम्माननीय | अनुगृह | अनुग्रह |
| श्रृंगार | शृंगार | निरिक्षण | निरीक्षण |
| पुज्य | पूज्य | कवियत्री | कवयित्री |
अधिकांश अशुद्धियाँ एक ही कारण से बनती हैं — बोलने में जो ध्वनि छोटी हो जाती है, वही लिखने में छूट जाती है। परीक्षा में ई दीर्घ है, इसलिए परिक्षा लिखना अशुद्ध है।
✗ श्रृंगार शुद्ध वर्तनी है | ✓ शुद्ध रूप शृंगार है — श के नीचे ऋ, श्र नहीं
वाक्य की सामान्य अशुद्धियाँ
| प्रकार | अशुद्ध | शुद्ध |
|---|---|---|
| लिंग | मेरी पुस्तक अच्छा है | मेरी पुस्तक अच्छी है |
| वचन | वह दो पुस्तक लाया | वह दो पुस्तकें लाया |
| कारक | राम ने हँसा | राम हँसा |
| पुनरुक्ति | वह वापस लौट आया | वह लौट आया |
| शब्द चयन | मुझे मालूम पड़ा | मुझे मालूम हुआ |
दो नियम अधिकांश वाक्य अशुद्धियाँ पकड़ लेते हैं। पहला — संज्ञा और विशेषण का लिंग मिलना चाहिए। दूसरा — ने केवल सकर्मक क्रिया के भूतकाल में लगता है, इसलिए राम ने हँसा अशुद्ध है।
पुनरुक्ति दोष
जब एक ही भाव वाक्य में दो बार आ जाए, तब पुनरुक्ति दोष होता है। यह अर्हता पत्र में सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रकार है, क्योंकि ये वाक्य बोलचाल में सही लगते हैं।
- वापस लौटना — लौटने में वापस का भाव पहले से है।
- केवल मात्र — दोनों शब्द एक ही अर्थ देते हैं।
- पीछे अनुसरण करना — अनुसरण का अर्थ ही पीछे चलना है।
- अत्यंत सुंदरतम — सुंदरतम में ही सर्वोच्चता है।
शोधन का क्रम
- पहले लिंग मिलाइए।
- फिर वचन मिलाइए।
- फिर कारक चिह्न जाँचिए, विशेषकर ने।
- अंत में अनावश्यक शब्द ढूँढ़िए।
यह क्रम इसलिए उपयोगी है कि अधिकांश अशुद्धियाँ पहले दो चरणों में ही पकड़ में आ जाती हैं। पूरा वाक्य बार-बार पढ़ने के बजाय एक-एक चरण जाँचिए — समय बचेगा और चूक नहीं होगी।
TRE संकेत: पुनरुक्ति दोष इस विषय का सबसे तय प्रश्न है — वापस लौटना, केवल मात्र, अत्यंत सुंदरतम। वर्तनी में आशीर्वाद, उज्ज्वल, शृंगार, ब्राह्मण चार सबसे अधिक आने वाले शब्द हैं। राम ने हँसा वाली अशुद्धि भी लगभग हर वर्ष आती है। शिक्षक पद के लिए यह विषय दोहरा महत्व रखता है।
60 सेकंड का रिवीजन
- शुद्ध रूप — आशीर्वाद, उज्ज्वल, शृंगार, ब्राह्मण, अनुग्रह।
- परीक्षा और निरीक्षण में ई दीर्घ है।
- संज्ञा और विशेषण का लिंग तथा कर्ता और क्रिया का वचन मिलना चाहिए।
- ने केवल सकर्मक क्रिया के भूतकाल में लगता है — राम हँसा, राम ने हँसा नहीं।
- वापस लौटना और केवल मात्र पुनरुक्ति दोष हैं।
- शोधन का क्रम — लिंग, वचन, कारक, फिर अनावश्यक शब्द।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पुनरुक्ति दोष क्या होता है?
जब वाक्य में एक ही भाव दो बार आ जाए। वापस लौटना में लौटने का अर्थ ही वापस आना है, इसलिए वापस अनावश्यक है। केवल मात्र और अत्यंत सुंदरतम भी इसी दोष के उदाहरण हैं और अर्हता पत्र में बार-बार पूछे जाते हैं।
राम ने हँसा अशुद्ध क्यों है?
क्योंकि ने केवल सकर्मक क्रिया के भूतकाल में लगता है और हँसना अकर्मक क्रिया है, जिसका कोई कर्म नहीं होता। शुद्ध रूप राम हँसा होगा। यह कारक संबंधी सबसे आम अशुद्धि है और लगभग हर वर्ष दोहराई जाती है।
वर्तनी की गलती से कैसे बचें?
शब्द को धीरे-धीरे बोलकर मात्रा की लंबाई जाँचिए। परीक्षा और निरीक्षण में ई दीर्घ है, इसलिए छोटी इ वाला विकल्प तुरंत हट जाता है। बोलने में जो ध्वनि छोटी हो जाती है, लिखने में वही छूटती है, इसलिए वहीं ध्यान दीजिए।
वाक्य शुद्धि किस क्रम में जाँचनी चाहिए?
पहले संज्ञा और विशेषण का लिंग, फिर कर्ता और क्रिया का वचन, फिर कारक चिह्न विशेषकर ने, और अंत में अनावश्यक शब्द। अधिकांश अशुद्धियाँ पहले दो चरणों में ही पकड़ में आ जाती हैं, इसलिए यह क्रम समय बचाता है।
