गुप्त काल एवं स्वर्ण युग
गुप्त काल एवं स्वर्ण युग
गुप्त काल से प्रश्न प्रायः दो जगह से आते हैं — किस शासक की क्या उपलब्धि थी, और इस युग को स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है। दूसरा प्रश्न विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसका उत्तर एक नहीं बल्कि कई क्षेत्रों की उपलब्धियों में है।
शासक
| शासक | प्रमुख तथ्य |
|---|---|
| श्रीगुप्त | वंश के संस्थापक |
| चंद्रगुप्त प्रथम | महाराजाधिराज की उपाधि; गुप्त संवत आरंभ |
| समुद्रगुप्त | व्यापक विजय; भारत का नेपोलियन कहलाए |
| चंद्रगुप्त द्वितीय | विक्रमादित्य; नवरत्नों का दरबार |
| कुमारगुप्त | नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना |
| स्कंदगुप्त | हूणों के आक्रमण का सामना किया |
समुद्रगुप्त की विजयों का विवरण प्रयाग प्रशस्ति में मिलता है, जिसे उनके दरबारी कवि हरिषेण ने लिखा था। उन्हें भारत का नेपोलियन इतिहासकार वी. ए. स्मिथ ने कहा था।
चंद्रगुप्त द्वितीय के काल में चीनी यात्री फ़ाह्यान भारत आया। उनके दरबार में नवरत्न माने जाते हैं, जिनमें कालिदास सबसे प्रसिद्ध हैं।
स्वर्ण युग क्यों
- साहित्य — कालिदास की अभिज्ञानशाकुंतलम, मेघदूत और रघुवंशम।
- विज्ञान — आर्यभट ने शून्य तथा दशमलव पद्धति पर कार्य किया और पृथ्वी के घूमने की बात कही।
- चिकित्सा — वाग्भट और धन्वंतरि का काल।
- कला — अजंता की चित्रकला और मंदिर स्थापत्य का विकास।
- धातु विज्ञान — दिल्ली का लौह स्तंभ, जिस पर आज तक जंग नहीं लगा।
इनमें आर्यभट और कालिदास सबसे अधिक पूछे जाते हैं। दिल्ली का लौह स्तंभ इस काल की धातु विद्या का प्रमाण है और उसका उल्लेख भी बार-बार आता है।
✗ गुप्त काल में समाज हर दृष्टि से आदर्श था, इसीलिए उसे स्वर्ण युग कहते हैं | ✓ यह नाम मुख्यतः साहित्य, विज्ञान और कला की उपलब्धियों के लिए है; सामाजिक असमानताएँ इस काल में भी बनी रहीं
गुप्त और मौर्य की तुलना
| बिंदु | मौर्य | गुप्त |
|---|---|---|
| शासन | अत्यंत केंद्रीकृत | अपेक्षाकृत विकेंद्रित |
| सामंत | नहीं | सामंतों को भूमि अनुदान |
| मुद्रा | चाँदी और ताँबे के आहत सिक्के | सोने के सिक्के अधिक |
| धर्म | बौद्ध धर्म को संरक्षण | वैदिक धर्म का पुनरुत्थान |
| स्रोत | अर्थशास्त्र, इंडिका | प्रयाग प्रशस्ति, फ़ाह्यान का विवरण |
सबसे बड़ा अंतर भूमि अनुदान का है। गुप्त शासकों ने अधिकारियों और ब्राह्मणों को भूमि दी, जिससे सामंती व्यवस्था की नींव पड़ी। मौर्य शासन में वेतन नक़द दिया जाता था।
गुप्त काल में बिहार
गुप्त वंश का उदय मगध से ही हुआ और पाटलिपुत्र इस काल में भी प्रमुख नगर रहा। नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना कुमारगुप्त ने की, जो आगे चलकर एशिया का सबसे बड़ा शिक्षा केंद्र बना।
फ़ाह्यान ने पाटलिपुत्र का वर्णन किया है और वहाँ की धर्मशालाओं तथा चिकित्सालयों की प्रशंसा की है। इसीलिए बिहार की परीक्षा में गुप्त काल पर प्रश्न प्रायः नालंदा और पाटलिपुत्र से ही जुड़ता है।
स्वर्ण युग वाला प्रश्न पूछे जाने पर केवल एक क्षेत्र मत गिनाइए। साहित्य, विज्ञान, कला और धातु विद्या — चारों की उपलब्धियाँ मिलकर ही यह नाम बनाती हैं, और विकल्प प्रायः इसी बहुआयामी उत्तर की जाँच करते हैं।
TRE संकेत: समुद्रगुप्त भारत के नेपोलियन — यह लगभग तय प्रश्न है। नालंदा की स्थापना कुमारगुप्त ने की भी तयशुदा है। आर्यभट और शून्य तथा फ़ाह्यान चंद्रगुप्त द्वितीय के काल में आया भी सीधे पूछे गए हैं।
60 सेकंड का रिवीजन
- समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहा जाता है।
- उनकी विजयों का वर्णन हरिषेण की प्रयाग प्रशस्ति में है।
- चंद्रगुप्त द्वितीय के काल में फ़ाह्यान भारत आया।
- कालिदास और आर्यभट इसी युग के हैं।
- नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना कुमारगुप्त ने की।
- गुप्त शासकों के भूमि अनुदान से सामंती व्यवस्था की नींव पड़ी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुप्त काल को स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है?
क्योंकि इस काल में एक साथ कई क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियाँ हुईं। साहित्य में कालिदास, गणित और खगोल में आर्यभट, चिकित्सा में वाग्भट, कला में अजंता की चित्रकला और धातु विद्या में दिल्ली का लौह स्तंभ। इतने क्षेत्रों में एक साथ ऐसी प्रगति भारतीय इतिहास में दुर्लभ है।
समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन क्यों कहा जाता है?
इतिहासकार वी. ए. स्मिथ ने उन्हें यह नाम उनकी व्यापक सैन्य विजयों के कारण दिया। उन्होंने उत्तर भारत के अनेक राज्यों को जीतकर मिला लिया और दक्षिण के शासकों को अधीनता स्वीकार करवाई। इन विजयों का विस्तृत विवरण उनके दरबारी कवि हरिषेण की प्रयाग प्रशस्ति में मिलता है।
गुप्त और मौर्य शासन में मूल अंतर क्या था?
मौर्य शासन अत्यंत केंद्रीकृत था, जहाँ अधिकारियों को नक़द वेतन मिलता था और राजा का सीधा नियंत्रण दूर-दूर तक था। गुप्त शासन अपेक्षाकृत विकेंद्रित था और वहाँ अधिकारियों तथा ब्राह्मणों को भूमि अनुदान दिए जाते थे, जिससे आगे चलकर सामंती व्यवस्था विकसित हुई।
नालंदा की स्थापना किसने की?
कुमारगुप्त ने। यह आगे चलकर एशिया का सबसे बड़ा शिक्षा केंद्र बना, जहाँ चीन, कोरिया, तिब्बत और मध्य एशिया तक से विद्यार्थी पढ़ने आते थे। बिहार में स्थित होने के कारण राज्य की परीक्षाओं में यह तथ्य विशेष रूप से पूछा जाता है।
