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Kaal aur Vachya

By ExamAtlas · 9/2/2026

काल और वाच्य

क्रिया के जिस रूप से कार्य के होने का समय जाना जाए उसे काल कहते हैं, और क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि वाक्य में कर्ता, कर्म या भाव में से कौन प्रधान है, उसे वाच्य कहते हैं। दोनों क्रिया के रूप से जुड़े हैं।

काल के तीन मुख्य भेद

कालअर्थउदाहरण
भूतकालबीता हुआ समयउसने पत्र लिखा
वर्तमान कालचल रहा समयवह पत्र लिखता है
भविष्यत् कालआने वाला समयवह पत्र लिखेगा

काल की पहचान क्रिया के रूप से

काल का निर्णय क्रिया के अंतिम रूप से होता है, वाक्य में आए समयसूचक शब्द से नहीं। 'कल वह आएगा' और 'कल वह आया था' दोनों में 'कल' है, पर एक भविष्यत् और दूसरा पूर्ण भूत है। इसी कारण परीक्षा में समयसूचक शब्द जानबूझकर भ्रम पैदा करने के लिए रखा जाता है।

भूतकाल के छह भेद

  • सामान्य भूत — उसने पत्र लिखा।
  • आसन्न भूत — उसने पत्र लिखा है।
  • पूर्ण भूत — उसने पत्र लिखा था।
  • अपूर्ण भूत — वह पत्र लिख रहा था।
  • संदिग्ध भूत — उसने पत्र लिखा होगा।
  • हेतुहेतुमद् भूत — यदि वह आता तो पत्र लिखता।

वर्तमान काल के तीन भेद हैं — सामान्य, अपूर्ण और संदिग्ध; तथा भविष्यत् काल के दो — सामान्य और संभाव्य।

क्रिया के भेद

कर्म के आधार पर क्रिया दो प्रकार की होती है। सकर्मक क्रिया में कर्म होता है — राम पत्र लिखता है। अकर्मक क्रिया में कर्म नहीं होता — राम सोता है। वाच्य समझने के लिए यह भेद आवश्यक है, क्योंकि कर्मवाच्य केवल सकर्मक क्रिया से बनता है और भाववाच्य केवल अकर्मक क्रिया से।

बनावट के आधार पर क्रिया के अन्य भेद भी हैं — प्रेरणार्थक (लिखवाना), संयुक्त (पढ़ने लगा), नामधातु (शरमाना) और पूर्वकालिक (खाकर गया)।

वाच्य के तीन भेद

वाच्यप्रधानउदाहरण
कर्तृवाच्यकर्ताराम पत्र लिखता है
कर्मवाच्यकर्मराम के द्वारा पत्र लिखा जाता है
भाववाच्यभाव या क्रियामुझसे चला नहीं जाता

भाववाच्य में क्रिया सदा अन्य पुरुष, पुल्लिंग और एकवचन में रहती है, तथा प्रायः निषेधात्मक वाक्यों में आता है — यही उसकी सबसे पक्की पहचान है। कर्मवाच्य में 'के द्वारा' या 'से' का प्रयोग होता है और क्रिया कर्म के अनुसार बदलती है।

'मुझसे चला नहीं जाता' कर्मवाच्य है।  |   यह भाववाच्य है; इसमें कर्म नहीं, भाव प्रधान है।

'उसने पत्र लिखा है' पूर्ण भूत है।  |   यह आसन्न भूत है; पूर्ण भूत में 'लिखा था' आता।

स्मरण सूत्र: कर्मवाच्य में कर्म प्रधान और 'के द्वारा' प्रयुक्त; भाववाच्य में न कर्ता न कर्म, केवल भाव, और वाक्य प्रायः निषेधात्मक।

काल और वाच्य से मिलाकर एक-दो प्रश्न आते हैं। भूतकाल के छह भेदों की पहचान सबसे अधिक पूछी जाती है, विशेषकर आसन्न भूत और पूर्ण भूत का अंतर — 'लिखा है' आसन्न, 'लिखा था' पूर्ण। वाच्य में सबसे बड़ा जाल भाववाच्य को कर्मवाच्य बताना है; निषेधात्मक और असमर्थता वाले वाक्य प्रायः भाववाच्य होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भूतकाल के कितने भेद होते हैं?

छह — सामान्य भूत, आसन्न भूत, पूर्ण भूत, अपूर्ण भूत, संदिग्ध भूत और हेतुहेतुमद् भूत। इनकी पहचान क्रिया के साथ लगने वाले सहायक शब्दों से होती है।

कर्मवाच्य और भाववाच्य में क्या अंतर है?

कर्मवाच्य में कर्म प्रधान होता है और 'के द्वारा' का प्रयोग होता है, जैसे राम के द्वारा पत्र लिखा जाता है। भाववाच्य में भाव प्रधान होता है, कर्म नहीं होता और वाक्य प्रायः निषेधात्मक होता है।

आसन्न भूत और पूर्ण भूत में अंतर कैसे पहचानें?

आसन्न भूत में कार्य अभी-अभी समाप्त हुआ है और क्रिया के साथ 'है' आता है, जैसे उसने लिखा है। पूर्ण भूत में कार्य बहुत पहले समाप्त हो चुका था और 'था' आता है।

60-second recap

  • काल तीन — भूत, वर्तमान, भविष्यत्।
  • भूतकाल के छह भेद; वर्तमान के तीन; भविष्यत् के दो।
  • आसन्न भूत में 'है', पूर्ण भूत में 'था'।
  • वाच्य तीन — कर्तृ, कर्म, भाव।
  • भाववाच्य में क्रिया अन्य पुरुष, पुल्लिंग, एकवचन और वाक्य प्रायः निषेधात्मक।
Kaal aur Vachya ke Bhed Udaharan Sahit | CTET Paper 1 — ExamAtlas