उपसर्ग और प्रत्यय
उपसर्ग और प्रत्यय
जो शब्दांश किसी शब्द के आरंभ में जुड़कर उसका अर्थ बदल देता है, उसे उपसर्ग कहते हैं; जो अंत में जुड़ता है, उसे प्रत्यय कहते हैं। दोनों स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं होते और दोनों नए शब्द बनाने के मुख्य साधन हैं।
प्रमुख संस्कृत उपसर्ग
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्र | आगे, अधिक | प्रगति, प्रबल, प्रहार |
| परा | उल्टा, पीछे | पराजय, पराक्रम |
| अनु | पीछे, समान | अनुकरण, अनुशासन |
| वि | विशेष, भिन्न | विज्ञान, विदेश, विनय |
| अधि | ऊपर, श्रेष्ठ | अधिकार, अध्यक्ष |
| सु | अच्छा | सुगम, सुपुत्र |
| नि | नीचे, अंदर | निवास, निबंध |
| दुर् / दुस् | बुरा, कठिन | दुर्गम, दुष्कर |
| उप | निकट, छोटा | उपवन, उपकार |
| अभि | सामने, ओर | अभिमान, अभियान |
हिंदी के अपने उपसर्ग भी हैं — अ, अन, कु, भर, बिन, सु — जैसे अछूता, अनपढ़, कुपुत्र, भरपेट, बिनब्याहा। उर्दू-फ़ारसी उपसर्ग भी चलते हैं — बे, ला, गैर, हम, बद — जैसे बेईमान, लाजवाब, गैरहाज़िर, हमराह, बदनाम।
प्रत्यय के दो भेद
- कृत् प्रत्यय — धातु या क्रिया के अंत में जुड़ते हैं और कृदंत शब्द बनाते हैं। लिख + आवट = लिखावट, पढ़ + आई = पढ़ाई, चल + अन = चलन।
- तद्धित प्रत्यय — संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण के अंत में जुड़ते हैं और तद्धितांत शब्द बनाते हैं। मानव + ता = मानवता, लोहा + आर = लोहार, बुढ़ + आपा = बुढ़ापा।
परीक्षा में यही अंतर पूछा जाता है — मूल शब्द क्रिया है तो कृत्, और संज्ञा या विशेषण है तो तद्धित।
प्रमुख प्रत्यय और उनसे बने शब्द
| प्रत्यय | प्रकार | उदाहरण |
|---|---|---|
| आवट | कृत् | सजावट, लिखावट, बनावट |
| आई | कृत् | पढ़ाई, लिखाई, चढ़ाई |
| अक | कृत् | पाठक, लेखक, गायक |
| ता | तद्धित | मानवता, सुंदरता, वीरता |
| पन | तद्धित | बचपन, अपनापन, लड़कपन |
| ई | तद्धित | गुजराती, बंगाली, धनी |
| वान / मान | तद्धित | धनवान, बुद्धिमान, गुणवान |
| इक | तद्धित | सामाजिक, धार्मिक, वार्षिक |
'इक' प्रत्यय जुड़ने पर मूल शब्द के पहले स्वर में वृद्धि हो जाती है — समाज से सामाजिक, धर्म से धार्मिक, इतिहास से ऐतिहासिक। यह नियम परीक्षा में सीधे पूछा जाता है।
एक ही शब्द में दोनों
अनेक शब्दों में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों होते हैं। जैसे अपमानित में 'अप' उपसर्ग और 'इत' प्रत्यय है, तथा मूल शब्द 'मान' है। ऐसे प्रश्न में पहले मूल शब्द पहचानिए, फिर आगे-पीछे के अंश अलग कीजिए।
✗ 'लिखावट' में 'आवट' तद्धित प्रत्यय है। | ✓ 'लिख' क्रिया है, इसलिए 'आवट' कृत् प्रत्यय है।
✗ 'बेईमान' में 'बे' प्रत्यय है। | ✓ 'बे' शब्द के आरंभ में है, इसलिए वह उपसर्ग है।
स्मरण सूत्र: उपसर्ग शब्द के आगे और प्रत्यय शब्द के पीछे; क्रिया से बना तो कृत्, संज्ञा-विशेषण से बना तो तद्धित।
इस विषय से लगभग एक प्रश्न निश्चित आता है, प्रायः किसी शब्द में उपसर्ग या प्रत्यय पहचानने का। सबसे बार-बार दोहराया जाने वाला जाल कृत् और तद्धित का है, इसलिए मूल शब्द की जाति देखिए। दूसरा जाल यह है कि विकल्प में उपसर्ग के स्थान पर प्रत्यय पूछ लिया जाता है। 'अ' और 'अन' जैसे निषेधवाचक उपसर्ग भी बार-बार आते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उपसर्ग और प्रत्यय में क्या अंतर है?
उपसर्ग शब्द के आरंभ में जुड़ता है और उसका अर्थ बदल देता है, जैसे प्र + गति = प्रगति। प्रत्यय शब्द के अंत में जुड़ता है और नया शब्द बनाता है, जैसे मानव + ता = मानवता।
कृत् और तद्धित प्रत्यय की पहचान कैसे करें?
यदि प्रत्यय किसी धातु या क्रिया के साथ जुड़ा है तो वह कृत् प्रत्यय है, जैसे पढ़ + आई। यदि वह संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण के साथ जुड़ा है तो तद्धित प्रत्यय है, जैसे लोहा + आर।
क्या एक शब्द में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों हो सकते हैं?
हाँ। जैसे अपमानित शब्द में 'अप' उपसर्ग, 'मान' मूल शब्द और 'इत' प्रत्यय है। ऐसे प्रश्न में पहले मूल शब्द पहचानना चाहिए।
60-second recap
- उपसर्ग आरंभ में, प्रत्यय अंत में जुड़ता है।
- प्रमुख संस्कृत उपसर्ग — प्र, परा, अनु, वि, अधि, सु, नि, दुर्, उप, अभि।
- हिंदी उपसर्ग — अ, अन, कु, भर, बिन; उर्दू — बे, ला, गैर, हम, बद।
- कृत् प्रत्यय क्रिया से, तद्धित प्रत्यय संज्ञा-विशेषण से।
- एक ही शब्द में दोनों हो सकते हैं — पहले मूल शब्द पहचानिए।
