Study Material

Pick a study material, then a subject, then start reading.

भारत की कृषि, खनिज एवं उद्योग

By ExamAtlas · 29/8/2026

भारत की कृषि, खनिज एवं उद्योग

इस अध्याय से प्रश्न प्रायः तीन बिंदुओं पर आते हैं — फ़सल ऋतुएँ और उनकी फ़सलें, विभिन्न क्रांतियाँ किस उत्पाद से जुड़ी हैं, और कौन-सा खनिज कहाँ मिलता है। तीनों तालिका के रूप में याद कीजिए, क्योंकि विकल्पों में इन्हें मिलाया जाता है।

फ़सल ऋतुएँ और प्रमुख फ़सलें

ऋतुबुआईफ़सलें
खरीफ़जून-जुलाईधान, मक्का, ज्वार, बाजरा, कपास
रबीअक्टूबर-नवंबरगेहूँ, चना, सरसों, मटर
ज़ायदमार्च-अप्रैलतरबूज़, खीरा, सब्ज़ियाँ

धान को अधिक जल और गर्मी चाहिए, इसलिए वह वर्षा ऋतु की फ़सल है। गेहूँ को ठंडा मौसम और पकते समय तेज़ धूप चाहिए, इसलिए वह जाड़े की फ़सल है। यह तर्क याद रहे तो ऋतु पहचानने में कभी भूल नहीं होगी।

प्रमुख नकदी फ़सलें हैं — गन्ना, कपास, जूट, चाय, कॉफ़ी और तिलहन। जूट मुख्यतः पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ भागों में तथा चाय असम और पश्चिम बंगाल में होती है।

विभिन्न क्रांतियाँ

क्रांतिकिससे संबंधित
हरितखाद्यान्न, विशेषकर गेहूँ
श्वेतदुग्ध उत्पादन
नीलीमत्स्य पालन
पीलीतिलहन
गुलाबीझींगा और प्याज़
भूरीचमड़ा और कोको

हरित क्रांति के जनक एम. एस. स्वामीनाथन माने जाते हैं और उसका सबसे अधिक लाभ पंजाब, हरियाणा तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश को मिला। श्वेत क्रांति के जनक वर्गीस कुरियन हैं और वह ऑपरेशन फ़्लड के नाम से चली।

✗ श्वेत क्रांति का संबंध कपास से है  |  ✓ श्वेत क्रांति दुग्ध उत्पादन से जुड़ी है; कपास का संबंध किसी अलग नाम से नहीं जोड़ा जाता

खनिज और ऊर्जा

खनिजप्रमुख क्षेत्र
लौह अयस्कओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक
कोयलाझरिया, बोकारो, रानीगंज
अभ्रकझारखंड, आंध्र, राजस्थान
बॉक्साइटओडिशा, झारखंड
पेट्रोलियममुंबई हाई, असम, गुजरात

भारत का अधिकांश खनिज प्रायद्वीपीय पठार से मिलता है, क्योंकि वहाँ प्राचीन कठोर चट्टानें हैं। इसीलिए उत्तरी मैदान में खनिज लगभग नहीं मिलते, और बिहार से खनिज पेटी नवंबर 2000 में झारखंड बनने के साथ अलग हो गई।

ऊर्जा के स्रोत दो प्रकार के हैं — परंपरागत जैसे कोयला, पेट्रोलियम और जल विद्युत, तथा गैर-परंपरागत जैसे सौर, पवन, बायोगैस और ज्वारीय ऊर्जा। दूसरे वर्ग को अक्षय भी कहा जाता है।

उद्योगों की स्थिति

उद्योग वहीं लगते हैं जहाँ कच्चा माल, ऊर्जा, श्रम, बाज़ार और परिवहन मिल जाएँ। इसीलिए लोहा-इस्पात उद्योग खनिज पेटी के पास लगे और सूती वस्त्र उद्योग महाराष्ट्र तथा गुजरात में।

उद्योगप्रमुख केंद्र
लोहा-इस्पातजमशेदपुर, भिलाई, राउरकेला, बोकारो
सूती वस्त्रमुंबई, अहमदाबाद, कोयंबटूर
जूटहुगली नदी के किनारे
चीनीउत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र
सूचना प्रौद्योगिकीबेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे

चीनी उद्योग गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के पास ही लगता है, क्योंकि कटने के बाद गन्ने में शर्करा की मात्रा तेज़ी से घटती है। यही कारण बिहार के उत्तरी ज़िलों में चीनी मिलों की स्थिति समझा देता है।

क्रांतियों के नाम रंग से याद कीजिए — हरा खेत यानी खाद्यान्न, सफ़ेद दूध, नीला पानी और मछली, पीला सरसों यानी तिलहन। रंग और उत्पाद का यह संबंध लगभग हर बार काम आता है।

TRE संकेत: श्वेत क्रांति और वर्गीस कुरियन तथा हरित क्रांति और स्वामीनाथन लगभग हर बार आते हैं। चीनी उद्योग कच्चे माल के पास भी तयशुदा है। बिहार की खनिज पेटी झारखंड में चली गई भी सीधे पूछा गया है।

60 सेकंड का रिवीजन

  • खरीफ़ वर्षा ऋतु की और रबी शीत ऋतु की फ़सलें हैं।
  • धान खरीफ़ और गेहूँ रबी की प्रमुख फ़सल है।
  • हरित क्रांति खाद्यान्न और श्वेत क्रांति दुग्ध से जुड़ी है।
  • नीली क्रांति मत्स्य और पीली क्रांति तिलहन से संबंधित है।
  • भारत का अधिकांश खनिज प्रायद्वीपीय पठार से मिलता है।
  • चीनी उद्योग गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के पास ही लगता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीनी मिलें गन्ना क्षेत्र के पास ही क्यों लगती हैं?

क्योंकि गन्ना कटने के बाद उसमें शर्करा की मात्रा तेज़ी से घटने लगती है। यदि उसे दूर ले जाया जाए तो चीनी की मात्रा और गुणवत्ता दोनों घट जाती हैं। इसके अलावा गन्ना भारी और अधिक जगह घेरने वाला होता है, इसलिए उसकी ढुलाई भी महँगी पड़ती है।

हरित क्रांति का सबसे अधिक लाभ किन क्षेत्रों को मिला?

पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को, क्योंकि वहाँ सिंचाई की सुविधा पहले से अच्छी थी और किसान अधिक उपज देने वाले बीज तथा उर्वरक अपनाने की स्थिति में थे। पूर्वी भारत में सिंचाई और साधनों की कमी के कारण उसका लाभ अपेक्षाकृत कम पहुँचा।

भारत का अधिकांश खनिज पठार से ही क्यों मिलता है?

क्योंकि प्रायद्वीपीय पठार भारत का सबसे प्राचीन भूभाग है और वहाँ की कठोर आग्नेय तथा रूपांतरित चट्टानों में खनिज बने। उत्तरी मैदान अपेक्षाकृत नया है और वह नदियों की लाई जलोढ़ मिट्टी से बना है, जिसमें खनिज नहीं बनते। इसीलिए वहाँ खेती तो अच्छी होती है पर खनिज नहीं मिलते।

परंपरागत और गैर-परंपरागत ऊर्जा में क्या अंतर है?

परंपरागत स्रोत जैसे कोयला और पेट्रोलियम सीमित हैं और एक बार समाप्त होने पर दोबारा नहीं बनते, साथ ही उनसे प्रदूषण भी होता है। गैर-परंपरागत स्रोत जैसे सौर, पवन और बायोगैस लगातार उपलब्ध रहते हैं और प्रदूषण बहुत कम करते हैं, इसलिए उन्हें अक्षय ऊर्जा कहा जाता है।

Checking your account…

Create a free ExamAtlas account to read the full study material.

Agriculture, Minerals and Industry | BPSC TRE 4.0 GS — ExamAtlas