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अपठित पद्यांश

By ExamAtlas · 2/9/2026

अपठित पद्यांश

अपठित पद्यांश वह काव्य अंश है जो पहले पढ़ा हुआ नहीं होता। गद्यांश से इसकी कठिनाई अधिक है क्योंकि कविता में शब्द कम और अर्थ अधिक होता है, शब्दक्रम बदला हुआ होता है और भाव लाक्षणिक होता है।

पद्यांश गद्यांश से कठिन क्यों

  • शब्द लाक्षणिक और प्रतीकात्मक अर्थ में आते हैं — 'दीपक' केवल दीया नहीं, आशा भी हो सकता है।
  • वाक्य का क्रम बदला रहता है, इसलिए पहले गद्य क्रम में लगाना पड़ता है।
  • छंद और तुक के लिए शब्द छोटे या पुराने रूप में आते हैं।
  • एक ही पंक्ति के कई अर्थ संभव होते हैं, इसलिए 'सबसे उपयुक्त' विकल्प चुनना पड़ता है।

हल करने की विधि

  1. पूरे पद्यांश को एक बार बिना रुके पढ़िए; टुकड़ों में अर्थ नहीं खुलता।
  2. प्रत्येक पंक्ति को मन में गद्य क्रम में रखिए — कर्ता, कर्म, क्रिया।
  3. कठिन शब्द का अर्थ आसपास की पंक्ति से अनुमान कीजिए।
  4. पूरे अंश का केंद्रीय भाव एक वाक्य में मन में बनाइए।
  5. अब प्रश्न हल कीजिए और हर उत्तर को उसी भाव से मिलाइए।

काव्य के जो तत्व पूछे जाते हैं

तत्वअर्थउदाहरण
अनुप्रासएक ही वर्ण की आवृत्तिचारु चंद्र की चंचल किरणें
यमकएक शब्द दो बार, अर्थ अलगकनक कनक ते सौ गुनी
श्लेषएक शब्द, एक बार, दो अर्थरहिमन पानी राखिए
उपमादो वस्तुओं की समानतामुख चंद्रमा के समान
रूपकउपमेय पर उपमान का आरोपचरण-कमल बंदौ हरि राई
मानवीकरणजड़ वस्तु में मानव भावलहरें हँस रही हैं

यमक और श्लेष का अंतर बार-बार पूछा जाता है — यमक में शब्द दो बार आता है और हर बार अर्थ अलग होता है, जबकि श्लेष में शब्द एक ही बार आता है और उसके दो अर्थ निकलते हैं।

कक्षा में कविता

प्राथमिक कक्षा में कविता का उद्देश्य विश्लेषण नहीं, आनंद है। पहले लय के साथ सुनाइए और बच्चों से दोहरवाइए, फिर चित्र बनवाइए या अभिनय कराइए, और अंत में भाव पर बात कीजिए। पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ लिखवाना कविता को मार देता है — यह बात CTET की शिक्षाशास्त्र संबंधी प्रश्नों में सीधे पूछी जाती है।

'कनक कनक ते सौ गुनी' में श्लेष अलंकार है।  |   यहाँ यमक है, क्योंकि 'कनक' दो बार आया है और दोनों बार अर्थ अलग है।

स्मरण सूत्र: यमक में शब्द दो बार, श्लेष में एक बार; उपमा में समानता बताई जाती है, रूपक में आरोप किया जाता है।

पद्यांश से भी लगभग उतने ही प्रश्न आते हैं जितने गद्यांश से, और उनमें एक-दो प्रश्न अलंकार या भाव पर होते हैं। सबसे अधिक दोहराया जाने वाला जाल यमक और श्लेष का है, तथा दूसरा उपमा और रूपक का। शिक्षाशास्त्रीय रूप में प्रश्न आता है कि प्राथमिक कक्षा में कविता कैसे पढ़ाई जाए — सही उत्तर सदा लय, आनंद और अभिनय वाला होता है, शब्दार्थ लिखवाने वाला नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यमक और श्लेष अलंकार में क्या अंतर है?

यमक में एक ही शब्द दो या अधिक बार आता है और हर बार उसका अर्थ भिन्न होता है। श्लेष में शब्द एक ही बार आता है पर उसके दो अर्थ निकलते हैं, जैसे रहीम के दोहे में 'पानी'।

अपठित पद्यांश गद्यांश से कठिन क्यों लगता है?

क्योंकि कविता में शब्द कम और अर्थ अधिक होते हैं, शब्दक्रम बदला रहता है और भाषा लाक्षणिक होती है। इसलिए पहले पंक्तियों को गद्य क्रम में रखकर केंद्रीय भाव पकड़ना पड़ता है।

प्राथमिक कक्षा में कविता कैसे पढ़ाई जानी चाहिए?

लय और हाव-भाव के साथ सुनाकर, बच्चों से दोहरवाकर, चित्र बनवाकर और अभिनय कराकर। पंक्ति-दर-पंक्ति शब्दार्थ लिखवाना कविता के आनंद और अर्थ दोनों को नष्ट कर देता है।

60-second recap

  • पद्यांश कठिन है क्योंकि भाषा लाक्षणिक और शब्दक्रम बदला होता है।
  • पहले पूरा पढ़िए, गद्य क्रम में रखिए, केंद्रीय भाव बनाइए, फिर उत्तर दीजिए।
  • अनुप्रास, यमक, श्लेष, उपमा, रूपक, मानवीकरण सर्वाधिक पूछे जाते हैं।
  • यमक में शब्द दो बार, श्लेष में एक बार।
  • प्राथमिक कक्षा में कविता का उद्देश्य आनंद है, विश्लेषण नहीं।