सिंधु घाटी सभ्यता
The Indus Valley Civilisation
इस सभ्यता से प्रश्न लगभग निश्चित रूप से आता है और वह प्रायः तीन में से एक बिंदु पर होता है — कौन-सा स्थल किस नदी पर और किस राज्य में है, नगर नियोजन की क्या विशेषता थी, और कौन-सी बातें आज तक अज्ञात हैं। तीनों को अलग-अलग तालिका बनाकर याद कीजिए।
खोज और विस्तार
इस सभ्यता की खोज 1921 में हुई, जब दयाराम साहनी ने हड़प्पा की खुदाई की, और अगले वर्ष राखालदास बनर्जी ने मोहनजोदड़ो खोजा। इसे हड़प्पा सभ्यता भी कहा जाता है, क्योंकि सबसे पहले यही स्थल मिला था।
| स्थल | नदी | विशेषता |
|---|---|---|
| हड़प्पा | रावी | सबसे पहले खोजा गया स्थल |
| मोहनजोदड़ो | सिंधु | विशाल स्नानागार, अन्नागार |
| लोथल | भोगवा | बंदरगाह और गोदीबाड़ा |
| कालीबंगा | घग्घर | जुते हुए खेत के प्रमाण |
| धौलावीरा | — | जल संरक्षण की उन्नत व्यवस्था |
| राखीगढ़ी | — | भारत में सबसे बड़ा ज्ञात स्थल |
यह सभ्यता कांस्य युग की थी और उसका विस्तार आज के पाकिस्तान तथा भारत के पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश तक था। इसका काल लगभग 2500 से 1750 ईसा पूर्व माना जाता है।
नगर नियोजन
इस सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता उसका नगर नियोजन थी। नगर दो भागों में बँटे होते थे — ऊँचाई पर बना दुर्ग और नीचे बसा निचला नगर।
- सड़कें समकोण पर काटती थीं, जिसे जालनुमा व्यवस्था कहा जाता है।
- पक्की ईंटों का प्रयोग होता था और उनका अनुपात एक जैसा रहता था।
- ढकी हुई नालियाँ हर घर से जुड़ी थीं — यह सबसे उन्नत विशेषता मानी जाती है।
- घरों में कुएँ और स्नानघर होते थे।
जल निकासी व्यवस्था इस सभ्यता की सबसे प्रसिद्ध उपलब्धि है और परीक्षा में यही सबसे अधिक पूछी जाती है। मोहनजोदड़ो का विशाल स्नानागार संभवतः धार्मिक स्नान के लिए बना था।
✗ सिंधु घाटी के लोग लोहे का प्रयोग जानते थे | ✓ यह कांस्य युग की सभ्यता थी; लोहे का ज्ञान बाद के काल में आया
समाज, अर्थव्यवस्था और धर्म
अर्थव्यवस्था कृषि और व्यापार पर टिकी थी। गेहूँ, जौ, कपास और सरसों उगाई जाती थी, और कपास उगाने वाली विश्व की पहली सभ्यता यही मानी जाती है। मेसोपोटामिया से व्यापार के प्रमाण मिले हैं।
धर्म में मातृदेवी, पशुपति और वृक्ष की पूजा के संकेत मिलते हैं। कोई मंदिर नहीं मिला, जो एक उल्लेखनीय तथ्य है। समाज में शासक वर्ग का स्पष्ट प्रमाण भी नहीं मिला, न कोई बड़ा राजमहल और न कोई राजसी मक़बरा।
दो अनसुलझी बातें
पहली — लिपि आज तक पढ़ी नहीं जा सकी। वह चित्रात्मक है और दाएँ से बाएँ लिखी जाती थी। इसी कारण उनके शासन, भाषा और साहित्य के बारे में कुछ निश्चित नहीं कहा जा सकता।
दूसरी — पतन का कारण निश्चित नहीं है। बाढ़, जलवायु परिवर्तन, नदी का मार्ग बदलना, वनों की कटाई और बाहरी आक्रमण — सब सुझाए गए हैं, पर किसी एक पर सहमति नहीं है। परीक्षा में यह पूछा जाए तो अनिश्चितता ही सही उत्तर है।
स्थल और नदी की जोड़ी सबसे अधिक पूछी जाती है, इसलिए उसे मानचित्र पर देखकर याद कीजिए। हड़प्पा रावी पर, मोहनजोदड़ो सिंधु पर, कालीबंगा घग्घर पर और लोथल गुजरात में — यही चार जोड़ियाँ अधिकांश प्रश्न घेर लेती हैं।
TRE संकेत: जल निकासी व्यवस्था इस सभ्यता की सबसे अधिक पूछी जाने वाली विशेषता है। लोथल बंदरगाह था और लिपि आज तक नहीं पढ़ी जा सकी — दोनों तयशुदा हैं। कपास उगाने वाली पहली सभ्यता भी सीधे पूछा गया है।
60 सेकंड का रिवीजन
- इस सभ्यता की खोज 1921 में हड़प्पा की खुदाई से हुई।
- यह कांस्य युग की सभ्यता थी और लोहा उसे ज्ञात नहीं था।
- नगर दुर्ग और निचले नगर में बँटे होते थे।
- ढकी हुई नालियों वाली जल निकासी व्यवस्था सबसे उन्नत विशेषता थी।
- लोथल बंदरगाह और मोहनजोदड़ो विशाल स्नानागार के लिए जाना जाता है।
- इसकी लिपि आज तक पढ़ी नहीं जा सकी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता क्या मानी जाती है?
उसका नगर नियोजन, और उसमें भी जल निकासी व्यवस्था। सड़कें समकोण पर काटती थीं, घर पक्की ईंटों के बने थे, और हर घर की नाली मुख्य ढकी हुई नाली से जुड़ी थी। उस काल की किसी अन्य सभ्यता में ऐसी व्यवस्थित सफ़ाई व्यवस्था नहीं मिलती।
इस सभ्यता का पतन क्यों हुआ?
इसका निश्चित उत्तर आज भी नहीं है। विद्वानों ने बाढ़, जलवायु परिवर्तन, नदियों का मार्ग बदलना, वनों की कटाई से भूमि का बंजर होना और बाहरी आक्रमण — सभी कारण सुझाए हैं। किसी एक पर सहमति न होने के कारण यह प्रश्न आज भी खुला माना जाता है।
लोथल क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि वहाँ एक गोदीबाड़ा मिला है, जो इस सभ्यता के समुद्री व्यापार का सबसे ठोस प्रमाण है। लोथल आज के गुजरात में है और उसे इस सभ्यता का बंदरगाह नगर माना जाता है। मेसोपोटामिया से व्यापार के प्रमाण भी इसी संदर्भ से जुड़ते हैं।
इस सभ्यता के शासन के बारे में क्या पता है?
बहुत कम, और इसका कारण यह है कि उनकी लिपि पढ़ी नहीं जा सकी। न कोई बड़ा राजमहल मिला है, न कोई राजसी मक़बरा, और न कोई मंदिर। इसीलिए यह भी निश्चित नहीं कि वहाँ राजतंत्र था या व्यापारियों का कोई सामूहिक शासन।
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