पृथ्वी की आंतरिक संरचना एवं प्लेट विवर्तनिकी
पृथ्वी की आंतरिक संरचना एवं प्लेट विवर्तनिकी
इस भाग से प्रश्न प्रायः दो जगह से आते हैं — पृथ्वी की परतों के नाम और उनकी विशेषताएँ, तथा भूकंप और ज्वालामुखी का संबंध प्लेट सीमाओं से। दोनों को एक साथ समझिए, क्योंकि दूसरा पहले से ही निकलता है।
आंतरिक संरचना
| परत | गहराई | बनावट |
|---|---|---|
| भूपर्पटी | सबसे बाहरी और पतली | सिलिका और ऐलुमिनियम |
| मैंटल | भूपर्पटी के नीचे मोटी परत | सिलिका और मैग्नीशियम |
| बाह्य क्रोड | मैंटल के नीचे | तरल अवस्था में |
| आंतरिक क्रोड | सबसे भीतर | ठोस; निकल और लोहा |
भूपर्पटी महाद्वीपों के नीचे मोटी और महासागरों के नीचे पतली होती है। सबसे भीतरी भाग को निफ़े भी कहा जाता है, क्योंकि वहाँ निकल और लोहा प्रमुख हैं। भीतर जाने पर ताप और दाब दोनों बढ़ते जाते हैं।
प्लेट विवर्तनिकी
भूपर्पटी एक अखंड परत नहीं, बल्कि कई बड़े टुकड़ों में बँटी है, जिन्हें प्लेट कहते हैं। ये प्लेटें मैंटल के ऊपर बहुत धीमी गति से खिसकती रहती हैं, और उनकी सीमाओं पर ही अधिकांश भूकंप तथा ज्वालामुखी होते हैं।
- अपसारी सीमा — प्लेटें एक-दूसरे से दूर हटती हैं; नई भूपर्पटी बनती है।
- अभिसारी सीमा — प्लेटें टकराती हैं; पर्वत बनते हैं और खाइयाँ भी।
- रूपांतर सीमा — प्लेटें एक-दूसरे के साथ-साथ खिसकती हैं; भूकंप अधिक आते हैं।
हिमालय भारतीय और यूरेशियन प्लेट के टकराने से बना और आज भी उसकी ऊँचाई धीरे-धीरे बढ़ रही है, क्योंकि टक्कर अब भी जारी है। यही कारण है कि हिमालयी क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील है।
भूकंप
भूकंप का उद्गम भीतर जिस बिंदु पर होता है उसे भूकंप मूल और उसके ठीक ऊपर सतह के बिंदु को अधिकेंद्र कहते हैं। सबसे अधिक विनाश अधिकेंद्र के आसपास होता है।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| सीस्मोग्राफ़ | भूकंप तरंगें रिकॉर्ड करने वाला यंत्र |
| रिक्टर स्केल | भूकंप की तीव्रता मापने का पैमाना |
| प्राथमिक तरंग | सबसे तेज़; ठोस और तरल दोनों से गुज़रती है |
| द्वितीयक तरंग | केवल ठोस से गुज़रती है |
| धरातलीय तरंग | सबसे धीमी पर सबसे विनाशकारी |
द्वितीयक तरंगें तरल से नहीं गुज़रतीं — इसी तथ्य से वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि पृथ्वी का बाह्य क्रोड तरल अवस्था में है। यह बिंदु परीक्षा में सीधे पूछा जाता है।
✗ भूकंप की तीव्रता का सबसे विनाशकारी कारण प्राथमिक तरंगें होती हैं | ✓ प्राथमिक तरंगें सबसे तेज़ चलती हैं, पर सबसे अधिक विनाश धरातलीय तरंगों से होता है
ज्वालामुखी और अग्नि वलय
ज्वालामुखी वह दरार है जिससे पृथ्वी के भीतर का पिघला पदार्थ बाहर आता है। भीतर उसे मैग्मा और बाहर आने पर लावा कहते हैं।
- सक्रिय — जो अभी भी फटते रहते हैं।
- प्रसुप्त — जो लंबे समय से शांत हैं पर फट सकते हैं।
- मृत — जो अब कभी नहीं फटेंगे।
विश्व के अधिकांश ज्वालामुखी प्रशांत महासागर के चारों ओर स्थित हैं, और इस पेटी को प्रशांत अग्नि वलय कहा जाता है। भारत में बैरन द्वीप एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है, जो अंडमान में है।
भूकंप और ज्वालामुखी को अलग-अलग विषय मत मानिए। दोनों प्लेट सीमाओं की घटनाएँ हैं, इसलिए एक ही मानचित्र पर दोनों की पेटियाँ लगभग एक जगह मिलती हैं। यही तर्क अधिकांश प्रश्न हल कर देता है।
TRE संकेत: द्वितीयक तरंगें तरल से नहीं गुज़रतीं सबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य है। बैरन द्वीप भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी भी तयशुदा है। अधिकेंद्र और भूकंप मूल का अंतर तथा प्रशांत अग्नि वलय भी सीधे आए हैं।
60 सेकंड का रिवीजन
- पृथ्वी की चार मुख्य परतें भूपर्पटी, मैंटल, बाह्य क्रोड और आंतरिक क्रोड हैं।
- आंतरिक क्रोड ठोस है और उसमें निकल तथा लोहा प्रमुख हैं।
- अधिकांश भूकंप और ज्वालामुखी प्लेट सीमाओं पर होते हैं।
- हिमालय भारतीय और यूरेशियन प्लेट की टक्कर से बना है।
- द्वितीयक तरंगें तरल से नहीं गुज़रतीं, इसी से बाह्य क्रोड तरल सिद्ध हुआ।
- बैरन द्वीप भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वैज्ञानिकों को कैसे पता चला कि बाह्य क्रोड तरल है?
भूकंप तरंगों के व्यवहार से। द्वितीयक तरंगें केवल ठोस माध्यम से गुज़र सकती हैं, तरल से नहीं। जब देखा गया कि ये तरंगें पृथ्वी के एक निश्चित भाग से आगे नहीं जातीं, तो निष्कर्ष निकला कि वहाँ कोई तरल परत है। इसी से बाह्य क्रोड के तरल होने का पता चला।
हिमालय की ऊँचाई अब भी क्यों बढ़ रही है?
क्योंकि भारतीय प्लेट अब भी यूरेशियन प्लेट की ओर खिसक रही है और दोनों की टक्कर जारी है। इसी दबाव से पर्वत ऊपर उठते जाते हैं, यद्यपि यह वृद्धि बहुत धीमी होती है। इसी सक्रिय टक्कर के कारण हिमालयी क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से भी संवेदनशील माना जाता है।
अधिकेंद्र और भूकंप मूल में क्या अंतर है?
भूकंप मूल वह बिंदु है जो पृथ्वी के भीतर होता है और जहाँ से कंपन शुरू होता है। अधिकेंद्र उसके ठीक ऊपर धरातल पर स्थित बिंदु है। तरंगें सबसे पहले अधिकेंद्र तक पहुँचती हैं, इसीलिए वहीं सबसे अधिक विनाश होता है और उससे दूर जाने पर प्रभाव घटता जाता है।
प्रशांत अग्नि वलय क्या है?
यह प्रशांत महासागर के चारों ओर फैली वह पेटी है जहाँ विश्व के अधिकांश सक्रिय ज्वालामुखी और बहुत बड़ी संख्या में भूकंप केंद्रित हैं। इसका कारण यह है कि वहाँ कई प्लेटों की सीमाएँ मिलती हैं और उनका टकराव तथा खिसकना लगातार जारी रहता है।
