जीव एवं पर्यावरण: आवास, अनुकूलन, संरक्षण
Organisms and Environment: Habitat, Adaptation and Conservation
पर्यावरण वाले भाग से प्रश्न प्रायः दो तरह के आते हैं — किसी जीव का कोई अनुकूलन देकर उसका आवास पूछना, या संरक्षण से जुड़े पद जैसे संकटग्रस्त प्रजाति और अभयारण्य की परिभाषा पूछना। दोनों को उदाहरण सहित देख लीजिए।
आवास और अनुकूलन
जिस स्थान पर कोई जीव रहता है उसे आवास कहते हैं और वहाँ रहने लायक बनाने वाले विशेष गुणों को अनुकूलन। आवास मुख्यतः स्थलीय और जलीय होते हैं।
| आवास | जीव | अनुकूलन |
|---|---|---|
| मरुस्थल | ऊँट, नागफनी | लंबे पैर, पत्तियाँ काँटों में बदली, मोटा तना |
| पर्वत | याक, चीड़ | मोटे बाल, शंकु आकार का वृक्ष |
| समुद्र | मछली, डॉल्फ़िन | धारारेखीय शरीर, गिल |
| घास का मैदान | शेर, हिरण | तेज़ दौड़ने की क्षमता, रंग से छिपाव |
नागफनी की पत्तियाँ काँटों में बदल जाती हैं ताकि वाष्पोत्सर्जन से जल की हानि कम हो, और भोजन बनाने का काम उसका हरा तना करता है। ऊँट के लंबे पैर उसे तपती रेत से दूर रखते हैं और वह बहुत कम मूत्र त्यागता है।
पारितंत्र और आहार शृंखला
किसी क्षेत्र के सभी जीव और उनका निर्जीव परिवेश मिलकर पारितंत्र बनाते हैं। इसमें उत्पादक हरे पौधे होते हैं, उपभोक्ता जंतु और अपघटक सूक्ष्मजीव।
घास → हिरण → शेर
आहार शृंखला सदैव उत्पादक से शुरू होती है, क्योंकि ऊर्जा का मूल स्रोत सूर्य है और उसे भोजन में बदलने का काम केवल पौधे कर सकते हैं। कई शृंखलाएँ आपस में जुड़कर आहार जाल बनाती हैं।
अपघटक मरे हुए जीवों को सड़ाकर पोषक तत्व मिट्टी में लौटाते हैं। यदि वे न हों तो मृत शरीरों का ढेर लग जाए और मिट्टी की उर्वरता समाप्त हो जाए।
✗ आहार शृंखला की शुरुआत शाकाहारी जंतु से होती है | ✓ वह सदैव उत्पादक यानी हरे पौधे से शुरू होती है
संरक्षण
| पद | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| संकटग्रस्त प्रजाति | जिनकी संख्या खतरनाक रूप से घट गई | बाघ, गैंडा, गिद्ध |
| विलुप्त प्रजाति | जो अब बची ही नहीं | डायनासोर, डोडो |
| स्थानिक प्रजाति | जो केवल किसी एक क्षेत्र में मिलती है | एशियाई सिंह |
| अभयारण्य | वन्य जीवों की सुरक्षा का क्षेत्र | वाल्मीकि, राजगीर |
| राष्ट्रीय उद्यान | पूरे पारितंत्र की सुरक्षा | वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान |
| जैवमंडल आरक्षित | जीव, वनस्पति और संस्कृति तीनों का संरक्षण | — |
बिहार का वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य पश्चिमी चंपारण में है और यह राज्य का प्रमुख संरक्षण क्षेत्र है। वन महोत्सव तथा चिपको आंदोलन वन संरक्षण से जुड़े प्रसिद्ध प्रयास हैं।
अपशिष्ट और तीन आर
कचरे को दो भागों में बाँटा जाता है — जैव निम्नीकरणीय जो सड़ जाता है, जैसे सब्ज़ी के छिलके और काग़ज़, और अजैव निम्नीकरणीय जो नहीं सड़ता, जैसे प्लास्टिक, काँच और धातु।
समाधान तीन आर में है — कम उपयोग, दोबारा उपयोग और पुनर्चक्रण। घर के गीले कचरे से कंपोस्ट बनाना और सूखे कचरे को अलग करके पुनर्चक्रण में भेजना दो सबसे व्यावहारिक कदम हैं।
अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान का अंतर सरल है — अभयारण्य में मुख्य ध्यान जंतुओं पर होता है और सीमित मानव गतिविधि चल सकती है, जबकि राष्ट्रीय उद्यान में पूरे पारितंत्र की रक्षा होती है और नियम अधिक कड़े होते हैं।
TRE संकेत: आहार शृंखला उत्पादक से शुरू होती है — यह तयशुदा प्रश्न है। नागफनी की पत्तियाँ काँटों में बदलती हैं, यह सीधे पूछा जाता है। बिहार से वाल्मीकि बाघ अभयारण्य और जैव तथा अजैव निम्नीकरणीय कचरे का अंतर भी बार-बार आए हैं।
60 सेकंड का रिवीजन
- आवास वह स्थान है जहाँ जीव रहता है; अनुकूलन उसे वहाँ रहने योग्य बनाते हैं।
- नागफनी की पत्तियाँ काँटों में बदलकर जल की हानि रोकती हैं।
- पारितंत्र में उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक होते हैं।
- आहार शृंखला सदैव हरे पौधों से शुरू होती है।
- संकटग्रस्त प्रजाति की संख्या बहुत घट चुकी होती है, विलुप्त प्रजाति बची ही नहीं।
- बिहार का वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान पश्चिमी चंपारण में है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नागफनी में पत्तियाँ काँटों में क्यों बदल जाती हैं?
मरुस्थल में पानी बहुत कम होता है और चौड़ी पत्तियों से वाष्पोत्सर्जन के रूप में बहुत जल उड़ जाता। पत्तियाँ काँटों में बदल जाने से यह हानि लगभग रुक जाती है। भोजन बनाने का काम उसका मोटा हरा तना संभाल लेता है, जो पानी संचित भी करता है।
अपघटक न हों तो क्या होगा?
मरे हुए पौधे और जंतु सड़ेंगे नहीं और उनके ढेर लगते चले जाएँगे। साथ ही उनके शरीर में बँधे पोषक तत्व मिट्टी में वापस नहीं लौटेंगे, जिससे मिट्टी धीरे-धीरे बंजर हो जाएगी और नए पौधे उग नहीं पाएँगे। इसीलिए अपघटक पारितंत्र की सफ़ाई और पुनर्चक्रण दोनों करते हैं।
अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान में क्या अंतर है?
अभयारण्य मुख्य रूप से वन्य जंतुओं की सुरक्षा के लिए बनाया जाता है और वहाँ कुछ सीमित मानवीय गतिविधियों की अनुमति रह सकती है। राष्ट्रीय उद्यान में पूरे पारितंत्र यानी वनस्पति, जंतु और भू-दृश्य तीनों की रक्षा होती है और वहाँ नियम कहीं अधिक कड़े होते हैं।
जैव और अजैव निम्नीकरणीय कचरे में क्या अंतर है?
जैव निम्नीकरणीय कचरा सूक्ष्मजीवों द्वारा सड़कर मिट्टी में मिल जाता है, जैसे सब्ज़ी के छिलके, काग़ज़ और पत्ते। अजैव निम्नीकरणीय कचरा वर्षों तक नहीं सड़ता, जैसे प्लास्टिक, काँच और धातु। इसीलिए घर पर ही गीला और सूखा कचरा अलग करना सबसे उपयोगी आदत है।
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