संज्ञा, सर्वनाम एवं विशेषण
संज्ञा, सर्वनाम एवं विशेषण
शब्द भेद से 2 प्रश्न आते हैं और वे प्रायः भेद पहचानने के होते हैं — दिए गए शब्द की संज्ञा कौन-सी है, सर्वनाम कौन-सा है, विशेषण किस प्रकार का है। परिभाषा से अधिक उदाहरण याद रखने पर ये प्रश्न तेज़ी से हल होते हैं।
संज्ञा के पाँच भेद
| भेद | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| व्यक्तिवाचक | किसी एक का नाम | राम, गंगा, पटना |
| जातिवाचक | पूरी जाति का नाम | लड़का, नदी, नगर |
| भाववाचक | भाव या गुण का नाम | बुढ़ापा, मिठास, वीरता |
| समूहवाचक | समूह का नाम | सेना, सभा, कक्षा |
| द्रव्यवाचक | पदार्थ का नाम | सोना, दूध, तेल |
भाववाचक संज्ञा सबसे अधिक पूछी जाती है, क्योंकि इसे संज्ञा, विशेषण, क्रिया और सर्वनाम — चारों से बनाया जा सकता है। मित्र से मित्रता, मीठा से मिठास, लिखना से लिखावट, अपना से अपनापन।
✗ बुढ़ापा जातिवाचक संज्ञा है | ✓ यह भाववाचक संज्ञा है, क्योंकि यह अवस्था का बोध कराती है
सर्वनाम के छह भेद
| भेद | उदाहरण |
|---|---|
| पुरुषवाचक | मैं, तुम, वह |
| निजवाचक | आप, स्वयं, अपने आप |
| निश्चयवाचक | यह, वह |
| अनिश्चयवाचक | कोई, कुछ |
| संबंधवाचक | जो, सो |
| प्रश्नवाचक | कौन, क्या |
यहाँ एक बारीकी है। आप शब्द दो भूमिकाओं में आता है — आदरसूचक पुरुषवाचक में जब किसी को संबोधित किया जाए, और निजवाचक में जब कर्ता स्वयं की ओर संकेत करे, जैसे मैं यह काम आप ही कर लूँगा।
यही अंतर पाँच विकल्पों वाले पत्र में प्रश्न बनता है, इसलिए वाक्य का अर्थ देखकर ही भेद तय कीजिए।
विशेषण के चार भेद
- गुणवाचक — गुण, रंग, दशा बताए, जैसे सुंदर, काला, पुराना।
- संख्यावाचक — गिनती बताए, जैसे दस, कुछ, दूसरा।
- परिमाणवाचक — नाप-तौल बताए, जैसे थोड़ा, दो किलो, बहुत।
- सार्वनामिक — सर्वनाम से बना विशेषण, जैसे यह लड़का, वह घर।
जिस संज्ञा की विशेषता बताई जाए वह विशेष्य कहलाती है। विशेषण की तीन अवस्थाएँ भी पूछी जाती हैं — मूलावस्था (सुंदर), उत्तरावस्था (सुंदरतर) और उत्तमावस्था (सुंदरतम)।
पहचान का सरल तरीका: शब्द से पहले कौन, क्या, कैसा, कितना पूछकर देखिए। कैसा का उत्तर मिले तो गुणवाचक, कितना का उत्तर मिले तो परिमाणवाचक या संख्यावाचक विशेषण है।
TRE संकेत: भाववाचक संज्ञा बनाना इस विषय का सबसे तय प्रश्न है — मित्र से मित्रता, मीठा से मिठास, लिखना से लिखावट। आप के दो प्रयोग — आदरसूचक और निजवाचक — अवश्य समझ लीजिए। विशेषण की तीन अवस्थाएँ भी बार-बार आती हैं, इसलिए सुंदर-सुंदरतर-सुंदरतम जैसा एक क्रम याद रखिए।
60 सेकंड का रिवीजन
- संज्ञा के पाँच भेद — व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक, समूहवाचक, द्रव्यवाचक।
- भाववाचक संज्ञा संज्ञा, विशेषण, क्रिया और सर्वनाम — चारों से बनती है।
- सर्वनाम के छह भेद हैं; आप पुरुषवाचक और निजवाचक दोनों हो सकता है।
- विशेषण के चार भेद — गुणवाचक, संख्यावाचक, परिमाणवाचक, सार्वनामिक।
- जिसकी विशेषता बताई जाए वह विशेष्य कहलाता है।
- विशेषण की तीन अवस्थाएँ — मूल, उत्तर और उत्तम।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भाववाचक संज्ञा कैसे बनाई जाती है?
चार तरह के शब्दों से। संज्ञा से — मित्र से मित्रता; विशेषण से — मीठा से मिठास; क्रिया से — लिखना से लिखावट; और सर्वनाम से — अपना से अपनापन। यह चारों दिशाओं वाली रचना ही इसे परीक्षा का सबसे लोकप्रिय प्रश्न बनाती है।
आप कब पुरुषवाचक और कब निजवाचक सर्वनाम होता है?
जब किसी दूसरे को आदर के साथ संबोधित किया जाए तब यह पुरुषवाचक है, जैसे आप कहाँ जा रहे हैं। जब कर्ता स्वयं की ओर संकेत करे तब निजवाचक है, जैसे मैं यह काम आप ही कर लूँगा। अर्थ देखकर ही भेद तय होता है।
विशेष्य और विशेषण में क्या अंतर है?
विशेषण वह शब्द है जो विशेषता बताता है और विशेष्य वह संज्ञा है जिसकी विशेषता बताई जा रही है। सुंदर लड़का में सुंदर विशेषण है और लड़का विशेष्य। एक ही वाक्य में दोनों साथ आते हैं, इसलिए दोनों नाम याद रखने चाहिए।
सार्वनामिक विशेषण किसे कहते हैं?
उस सर्वनाम को जो संज्ञा से पहले आकर उसकी विशेषता बताने लगे। वह घर बड़ा है में वह सार्वनामिक विशेषण है, जबकि वह जा रहा है में वही शब्द सर्वनाम है। स्थान और भूमिका बदलते ही भेद बदल जाता है।
