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वर्ण विचार: स्वर, व्यंजन एवं उच्चारण स्थान

By ExamAtlas · 29/8/2026

वर्ण विचार: स्वर, व्यंजन एवं उच्चारण स्थान

भाग-III हिंदी में व्याकरण से लगभग 25 प्रश्न आते हैं और वर्ण विचार से 2 प्रश्न लगभग तय हैं। स्वर-व्यंजन की गिनती, उनका वर्गीकरण और उच्चारण स्थान — ये तीनों सीधे पूछे जाते हैं, इसलिए इन्हें अनुमान से नहीं, संख्या के साथ याद करना चाहिए।

वर्णमाला की गिनती

वर्गसंख्यावर्ण
स्वर11अ आ इ ई उ ऊ ऋ ए ऐ ओ औ
व्यंजन33क् से ह् तक
मानक कुल4411 + 33
व्यावहारिक कुल5244 + अं अः + ड़ ढ़ + क्ष त्र ज्ञ श्र

यहीं सबसे बड़ी भ्रांति बनती है। मानक हिंदी वर्णमाला में 44 वर्ण हैं, पर देवनागरी लिपि की व्यावहारिक गिनती 52 मानी जाती है, क्योंकि उसमें अनुस्वार, विसर्ग, दो द्विगुण व्यंजन और चार संयुक्त व्यंजन जोड़ दिए जाते हैं।

हिंदी में 52 स्वर-व्यंजन मूल वर्ण हैं  |   मूल वर्ण 44 हैं; 52 की गिनती में अं, अः, ड़, ढ़ और चार संयुक्त वर्ण जुड़ते हैं

संयुक्त व्यंजन मूल वर्ण नहीं हैं — क्ष = क् + ष, त्र = त् + र, ज्ञ = ज् + ञ और श्र = श् + र। परीक्षा में इनका संधि-विच्छेद पूछा जाता है।

स्वरों का वर्गीकरण

  • ह्रस्व स्वर — अ, इ, उ, ऋ। इन्हें बोलने में कम समय लगता है।
  • दीर्घ स्वर — आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ।
  • संयुक्त स्वर — ए, ऐ, ओ, औ, क्योंकि ये दो स्वरों के मेल से बने हैं।
  • प्लुत स्वर — पुकारने में खिंचा हुआ स्वर, जैसे ओ३म्।

ऋ को ह्रस्व माना जाता है, यह बात अक्सर छूट जाती है। अं और अः स्वर नहीं, अयोगवाह कहलाते हैं, क्योंकि ये न पूरी तरह स्वर हैं और न व्यंजन।

व्यंजन एवं उच्चारण स्थान

उच्चारण स्थानवर्ण
कंठ्यअ आ, क वर्ग, ह, विसर्ग
तालव्यइ ई, च वर्ग, य, श
मूर्धन्यऋ, ट वर्ग, र, ष
दंत्यत वर्ग, ल, स
ओष्ठ्यउ ऊ, प वर्ग
दंतोष्ठ्य

पाँच वर्गों के व्यंजन स्पर्श कहलाते हैं, य र ल व अंतःस्थ, और श ष स ह ऊष्म। हर वर्ग का पाँचवाँ वर्ण — ङ, ञ, ण, न, म — नासिक्य है।

आसान तरीका: उच्चारण करते समय जीभ शरीर के जिस भाग को छूती है, वही उस वर्ण का उच्चारण स्थान है। क वर्ग बोलिए, आवाज़ गले से आएगी — इसलिए कंठ्य।

TRE संकेत: गिनती को दो हिस्सों में याद रखिए — मानक 44, व्यावहारिक 52 — क्योंकि प्रश्न दोनों तरह से बनता है। ऋ ह्रस्व है और अं-अः अयोगवाह हैं, ये दो बिंदु सबसे ज़्यादा गलत होते हैं। पाँच विकल्प और ऋणात्मक अंकन वाले पत्र में ऐसी बारीकियाँ ही अंतर बनाती हैं।

60 सेकंड का रिवीजन

  • स्वर 11, व्यंजन 33, मानक वर्णमाला 44 वर्ण।
  • व्यावहारिक 52 में अं, अः, ड़, ढ़ और क्ष, त्र, ज्ञ, श्र जुड़ते हैं।
  • ह्रस्व स्वर — अ, इ, उ, ऋ; शेष दीर्घ।
  • अं और अः अयोगवाह हैं, स्वर नहीं।
  • य र ल व अंतःस्थ, श ष स ह ऊष्म व्यंजन हैं।
  • हर वर्ग का पाँचवाँ वर्ण नासिक्य होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिंदी वर्णमाला में कुल कितने वर्ण हैं?

मानक गिनती में 44 — ग्यारह स्वर और तैंतीस व्यंजन। व्यावहारिक देवनागरी गिनती 52 मानती है, जिसमें अनुस्वार, विसर्ग, ड़, ढ़ और चार संयुक्त व्यंजन भी जोड़ लिए जाते हैं। प्रश्न में जो शब्द हो, उसी के अनुसार उत्तर चुनिए।

क्ष, त्र, ज्ञ और श्र मूल वर्ण क्यों नहीं हैं?

क्योंकि ये दो-दो व्यंजनों के मेल से बने हैं — क् और ष से क्ष, त् और र से त्र, ज् और ञ से ज्ञ, श् और र से श्र। मूल वर्ण वह है जिसे और तोड़ा न जा सके, इसलिए इन्हें संयुक्त व्यंजन कहा जाता है।

अयोगवाह किसे कहते हैं?

अं यानी अनुस्वार और अः यानी विसर्ग को, क्योंकि ये न शुद्ध स्वर हैं और न व्यंजन। इनका उच्चारण स्वर के सहारे होता है, पर गिनती स्वरों में नहीं होती। अनुस्वार नासिका से और विसर्ग कंठ से बोला जाता है।

नासिक्य व्यंजन कौन-से हैं?

हर स्पर्श वर्ग का पाँचवाँ व्यंजन — ङ, ञ, ण, न और म। इनका उच्चारण करते समय हवा नाक से भी निकलती है, इसीलिए इन्हें पंचमाक्षर या अनुनासिक व्यंजन भी कहा जाता है।